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Saturday, May 23, 2026

संघ अगर ज्यादा मजबूत होता तो नहीं होता भारत का बँटवारा: RSS के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर

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नई दिल्ली: भारत के बंटवारे का दर्द राष्ट्रवादियों को हमेशा सा चुभता रहा है, जो गाहे-बगाहे किसी न किसी रूप से उभर कर सामने आ जाता है। अबकी बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर (Sunil Ambekar) ने कहा कि बँटवारे के समय संघ उतना मजबूत नहीं था, नहीं तो देश का बँटवारा नहीं होता।

आंबेकर ने ये बातें दिल्ली में इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा पेश की गई डॉक्यूमेंट्री “दिल्ली में संघ यात्रा” की स्क्रीनिंग के दौरान कहीं। 1942 से 1947 के बीच के समय का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि RSS का दिल्ली और अविभाजित पंजाब में तेज़ी से विस्तार हुआ था, और बड़ी संख्या में लोग संगठन से जुड़ रहे थे, लेकिन उस समय इसकी ताक़त अभी भी सीमित थी।

उन्होंने कहा कि बँटवारे के दौरान, संघ के स्वयंसेवकों ने उन इलाकों में हिंदुओं की रक्षा के लिए काम किया जो पाकिस्तान का हिस्सा बन गए थे, और वे तब तक वहीं रहे जब तक “आखिरी व्यक्ति सुरक्षित जगह पर नहीं पहुँच गया”।

आंबेकर ने कहा कि हिंसा और पुनर्वास के प्रयासों के दौरान अनगिनत स्वयंसेवकों ने बलिदान दिया, जबकि विस्थापित लोगों के लिए कई शिविर लगाए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगस्त 1947 के पहले पखवाड़े में संघ प्रमुख एम.एस. गोलवलकर “श्री गुरुजी” कराची में थे, और उथल-पुथल के बीच राहत और सुरक्षा कार्यों पर स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर रहे थे।

आंबेकर ने कहा कि संघ के संस्थापक के.बी. हेडगेवार ने संगठन की स्थापना राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि “सांस्कृतिक जागरण” पैदा करने और समाज को मज़बूत बनाने के लिए की थी। उन्होंने कहा, “अगर डॉक्टर हेडगेवार राजनीति करना चाहते, तो वे एक राजनीतिक पार्टी बना सकते थे। उनका लक्ष्य समाज को संगठित करना और राष्ट्रीय आत्मविश्वास जगाना था।”

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में संघ की गतिविधियाँ हेडगेवार के जीवनकाल में ही शुरू हो गई थीं और संगठन के 100 साल के इतिहास से गहराई से जुड़ी रही हैं। संघ के दिल्ली प्रांत प्रचारक रितेश अग्रवाल ने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री ऐतिहासिक रिकॉर्ड, यादों, साक्षात्कारों और बँटवारे तथा आज़ादी के बाद के घटनाक्रमों से जुड़े पुरालेखीय सामग्री के ज़रिए, दिल्ली में संगठन की शुरुआती दौर से लेकर उसके विस्तार तक की यात्रा को दिखाती है।

 

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