मां नवजात ट्रैकिंग एप से हुआ खुलासा, पीएचसी से जुड़े अवैध अस्पतालों के तार
अमृतपुर/फर्रुखाबाद: सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन पीएचसी सरह से सामने आए मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां तैनात एएनएम अंजुम पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने, प्रसूताओं के रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी करने और अवैध अस्पतालों से सांठगांठ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।बताया जा रहा है कि पूरे मामले का खुलासा मां नवजात ट्रैकिंग एप के जरिए हुआ। एप में दर्ज जानकारी और अस्पताल के अभिलेखों में भारी अंतर मिलने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।
सूत्रों के अनुसार एक प्रसूता की डिलीवरी को लेकर अभिलेखों में बड़ा खेल किया गया। वास्तविक तारीख 22 मई 2026 बताई जा रही है, जबकि रिकॉर्ड में 30 मई 2026 दर्ज कर दिया गया। इतना ही नहीं, 03 जून 2026 को प्रसूता की छुट्टी भी कर दी गई। इससे जन्म प्रमाण पत्र और अस्पताल के दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठने लगे हैं।
जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब दो अलग-अलग प्रसूताओं के रिकॉर्ड में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज मिला। वहीं शिल्पी देवी पत्नी प्रमोद कुमार के नाम दर्ज मोबाइल नंबर 7982025037 पर संपर्क किया गया तो वह नंबर गलत निकला। इससे आशंका जताई जा रही है कि सरकारी रजिस्टरों में फर्जी तरीके से विवरण भरकर कागजी खेल किया गया।सूत्र यह भी बताते हैं कि पीएचसी सरह के आसपास संचालित कुछ अवैध अस्पतालों से भी इस पूरे नेटवर्क के तार जुड़े हो सकते हैं। आरोप है कि सरकारी अस्पताल आने वाली प्रसूताओं को डराकर निजी अस्पतालों में भेजा जाता है, जहां मोटी रकम वसूली जाती है।
एक पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि जब वह अपनी पत्नी की डिलीवरी कराने पीएचसी सरह पहुंचा तो उन्हें गंभीर स्थिति बताकर निजी अस्पताल भेज दिया गया। वहां प्रसूता का दो बार ऑपरेशन किया गया और लाखों रुपये खर्च कराए गए। पीड़ित का कहना है कि गलत इलाज और लापरवाही से उसकी पत्नी की जान तक खतरे में पड़ गई।
सूत्रों के मुताबिक एएनएम अंजुम पर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं। अस्पताल के डॉक्टरों से अभद्रता और कार्यशैली को लेकर शिकायतें विभागीय अधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अविनेंद्र कुमार और जिलाधिकारी अंकुर लाठर इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। क्योंकि जन्म प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ और गलत अभिलेख दर्ज करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार लोगों पर विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्यवाही भी हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो प्रसूता रजिस्टर, जन्म प्रमाण पत्र और रेफरल प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आ सकती है। लोगों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


