– कहा- “लंबे समय तक सहमति से बने संबंध को रेप नहीं माना जा सकता”
प्रयागराज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शारीरिक संबंध और शादी के वादे से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि लंबे समय तक सहमति से बने शारीरिक संबंधों को हर परिस्थिति में दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। अदालत ने गोरखपुर के पिपराइच थाने में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
मामला संजय उर्फ संजय कश्यप के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ा था। आरोप था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर करीब एक वर्ष तक महिला से शारीरिक संबंध बनाए। बाद में शादी न होने पर महिला ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि दोनों पक्ष लंबे समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे और दोनों परिवारों को भी उनके रिश्ते की जानकारी थी। कोर्ट ने माना कि संबंध सहमति से बने थे और ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि शुरुआत से ही आरोपी की मंशा धोखा देने की थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि दो बालिग व्यक्ति लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध में रहते हैं, तो बाद में रिश्ता टूट जाने मात्र से हर मामला दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल व्यक्तिगत संबंधों के विफल होने के बाद प्रतिशोध के रूप में नहीं होना चाहिए।
इस फैसले के बाद कानूनी और सामाजिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है। एक पक्ष इसे सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संदर्भ में महत्वपूर्ण फैसला मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के दृष्टिकोण से इस पर चर्चा कर रहा है।


