नई दिल्ली।मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर गहराने की आशंका जताई जा रही है। गीता गोपीनाथ ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका-ईरान संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही महंगाई, रुपये की कमजोरी और आर्थिक विकास दर पर भी गंभीर असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की पूर्व डिप्टी एमडी गीता गोपीनाथ ने कहा कि जून तक यदि मिडिल ईस्ट संकट और गहराता है, तो भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों को सबसे बड़ा झटका लग सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने पर सरकार और तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ जाता है। यदि तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आम जनता को ईंधन के बढ़े हुए दामों का बोझ उठाना पड़ सकता है।
गीता गोपीनाथ ने रुपया कमजोर होने की भी आशंका जताई है। उनका कहना है कि वैश्विक अस्थिरता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करते हैं, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव आता है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से आयात और महंगा हो सकता है, जिसका असर सीधे महंगाई पर दिखाई देगा।
आर्थिक जानकारों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल जारी रहा, तो खाद्य वस्तुओं से लेकर परिवहन, बिजली और उद्योग क्षेत्र तक लागत बढ़ सकती है। इसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा और सरकार के लिए महंगाई नियंत्रण बड़ी चुनौती बन सकती है।
मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव अब केवल क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। भारत के लिए आने वाले सप्ताह आर्थिक मोर्चे पर बेहद अहम माने जा रहे हैं।


