लखनऊ में अधिवक्ता समाज और पुलिस-प्रशासन के बीच टकराव का मामला अब खुलकर सड़क पर दिखाई देने लगा है। शहर के कई इलाकों में अधिवक्ताओं द्वारा बड़े-बड़े होर्डिंग और पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें 17 मई को “काला दिवस” बताया गया है। इन पोस्टरों में लाठीचार्ज के दौरान घायल हुए अधिवक्ताओं की तस्वीरें भी लगाई गई हैं, जिससे अधिवक्ता समुदाय में भारी नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।
दरअसल, 17 मई को अवैध चैंबर हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच विवाद बढ़ गया था। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज किया, जिसमें कई वकील घायल हो गए थे। घटना के बाद से अधिवक्ता संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं।
शहर में लगाए गए होर्डिंग अब इस विवाद को नया राजनीतिक और सामाजिक रंग देते नजर आ रहे हैं। पोस्टरों के जरिए अधिवक्ताओं ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे घटना को भूले नहीं हैं और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। कई स्थानों पर लगाए गए बैनरों में पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। वहीं अधिवक्ता संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
लखनऊ की यह लड़ाई अब केवल चैंबर हटाने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह पुलिस कार्रवाई, प्रशासनिक रवैये और अधिवक्ताओं के सम्मान के मुद्दे में बदलती दिखाई दे रही है।


