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Thursday, May 21, 2026

रिश्वतखोरी के आरोप में विजिलेंस यूनिट का बड़ा एक्शन, दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर और हेड कॉन्स्टेबल पर FIR

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के दो अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगने के बाद मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार, एक इंस्पेक्टर (Police Inspector) और एक हेड कॉन्स्टेबल (Head Constable) पर रिश्वतखोरी (Bribery), जबरन उगाही, मारपीट और पद के दुरुपयोग जैसे आरोपों में FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई विजिलेंस यूनिट द्वारा 15 मई को की गई। मामले में इंस्पेक्टर उदय सिंह(Uday Singh) और हेड कॉन्स्टेबल रोबिन को नामजद आरोपी बनाया गया है। दोनों अधिकारी स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट में तैनात बताए गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता दिनेश कुमार ने आरोप लगाया है कि 15 जुलाई 2024 को उन्हें रोहिणी स्थित एक सोसायटी के बाहर रोका गया था। पुलिसकर्मियों ने उन्हें सार्वजनिक रूप से हथकड़ी लगाई और लोगों के सामने उनके घर तक ले गए। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई, उनकी पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और धमकियां भी दी गईं। तलाशी के नाम पर करीब 20 लाख रुपये नकद, मंगलसूत्र और अन्य निजी सामान अपने कब्जे में ले लिया गया। गिरफ्तारी से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।

शिकायतकर्ता दिनेश कुमार ने पुलिसकर्मियों पर कई और गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि जेल में रहने के दौरान उनके Axis Bank के Credit Card का निजी इस्तेमाल किया गया। कई ट्रांजैक्शन उस समय हुए जब वह जेल में बंद थे। उन्होंने बैंक स्टेटमेंट और CCTV फुटेज का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उनका कार्ड पुलिसकर्मियों के कब्जे में था और उसका पिन हेड कॉन्स्टेबल रोबिन ने लिया था।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जेल में रहने के दौरान उनकी पत्नी पर लगातार दबाव बनाया गया और 15 लाख रुपये की मांग की गई। रकम नहीं देने पर लंबे समय तक जेल में रखने की धमकी दी गई। इसके अलावा, हेड कॉन्स्टेबल रोबिन ने उनकी पत्नी से Tata Nexon कार की मांग की, जो कथित तौर पर इंस्पेक्टर उदय सिंह के इशारे पर की गई थी। उन्होंने इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया है, जिसे Pan Drive में विजिलेंस यूनिट को सौंपे जाने की बात कही गई है।

दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 27 फरवरी 2026 को मिली शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है। FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और धारा 13(1) के तहत आरोप लगाए गए हैं। ये धाराएं सरकारी काम से जुड़े मामलों में रिश्वत लेने और लोक सेवक द्वारा आपराधिक दुराचार से संबंधित हैं।

इसके अलावा, BNS की धारा 316 के तहत भी केस दर्ज किया गया है, जो आपराधिक विश्वासघात यानी अमानत में खयानत से जुड़ी है। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर एक वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। विजिलेंस यूनिट फिलहाल मामले से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि आरोपों की पुष्टि की जा सके।

 

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