लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक फैसला लेते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था तय करने के लिए यह आयोग अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्ग की स्थिति और आरक्षण व्यवस्था का अध्ययन करेगा तथा छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव में आरक्षण संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को बनाया जाएगा। इसके अलावा आयोग में कुल पांच सदस्यों की नियुक्ति उत्तर प्रदेश सरकार करेगी। अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल छह माह निर्धारित किया गया है।
सरकार का कहना है कि आयोग सामाजिक और सांख्यिकीय आधार पर अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगा ताकि पंचायत चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया कानूनी और संवैधानिक रूप से मजबूत हो सके। पिछले पंचायत चुनावों के दौरान ओबीसी आरक्षण को लेकर उठे विवाद और न्यायालय की टिप्पणियों के बाद सरकार इस बार कोई कानूनी जोखिम नहीं लेना चाहती।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ा वर्ग बड़ा वोट बैंक माना जाता है और पंचायत चुनाव में इसकी भूमिका निर्णायक रहती है।


