नई दिल्ली। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर परियोजना पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में एक बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है, जबकि इससे पर्यावरण को भारी नुकसान और आदिवासी समुदायों के अधिकारों का खुला उल्लंघन हो रहा है।
करीब 92 हजार करोड़ रुपये की इस मेगा परियोजना में अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, आधुनिक टाउनशिप और ऊर्जा संयंत्र जैसी कई बड़ी योजनाएं शामिल हैं। सरकार इसे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ाने वाला प्रोजेक्ट बता रही है, लेकिन विपक्ष लगातार इसकी पर्यावरणीय मंजूरियों और वन अधिकार कानून के पालन पर सवाल उठा रहा है।
जयराम रमेश ने अपने पत्र में कहा कि सरकार द्वारा जारी तथ्यों में परियोजना की वास्तविक स्थिति को “भ्रामक तरीके” से पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पर्यावरणीय मंजूरियां संदिग्ध आधारों पर दी गईं और आदिवासी समुदायों के व्यक्तिगत व सामूहिक अधिकारों की अनदेखी की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा जरूरतों के नाम पर सरकार आलोचनाओं को दबाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि ग्रेट निकोबार में पहले से मौजूद आईएनएस बाज के विस्तार की योजनाएं वर्षों से लंबित हैं, जबकि अपेक्षाकृत कम पर्यावरणीय नुकसान वाली इन परियोजनाओं पर तेजी नहीं दिखाई गई। उनके मुताबिक, सरकार को विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण तथा आदिवासी अधिकारों के बीच संतुलन बनाना चाहिए।
ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर अब सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं। विपक्ष जहां इसे पर्यावरण और आदिवासी हितों के खिलाफ बता रहा है, वहीं केंद्र सरकार इसे देश की सामरिक और आर्थिक मजबूती के लिए बेहद अहम मान रही है।


