=जारी किए शोक कार्ड में पहले ही सैफेई परिवार और सपा मुखिया का था नाम गायब
=अंतिम यात्रा रथ में भी प्रतीक की पशुओं संग फोटो की भी चर्चा, कहीं पर भी नेताजी तक का नाम नहीं
यूथ इंडिया संवाददाता
लखनऊ। प्रतीक यादव की मौत के बाद अब राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बार सवालों के केंद्र में हैं भाजपा नेत्री अपर्णा यादव, और उनके भाई अमन बिष्ट । सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक लोग उनके शोक संदेश, सोशल मीडिया पोस्ट और प्रतीक यादव की बीमारी के दौरान उनकी मौजूदगी को लेकर कई तरह के सवाल उठा रहे हैं। भाई प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा वाले रथ में भी उनकी फोटो पशुओं के साथ प्रदर्शित की गई अंतिम संस्कार से पूर्व ही सैफई परिवार, सपा संस्थापक नेता जी समेत पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, शिवपाल यादव हर किसी को पहले ही बेदखल सा कर दिया गया जबकि प्रतीक के मौत के बाद अपर्णा से पहले ही पूरा परिवार मौके पर मौजूद रहा शिवपाल सिंह यादव तो लगातार भावुक अंदाज में डटे रहे।
सबसे ज्यादा चर्चा उस शोक कार्ड को लेकर हो रही है जिसमें कथित तौर पर नेताजी मुलायम सिंह यादव और सैफई परिवार का उल्लेख प्रमुखता से नहीं किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि समाजवादी परिवार की पहचान हमेशा सैफई परिवार और नेताजी की विरासत से जुड़ी रही है, ऐसे में इस तरह की अनुपस्थिति ने अटकलों को और हवा दे दी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यूजर्स चर्चा कर रहे हैं कि अपर्णा यादव ने अपने सार्वजनिक संदेश में प्रतीक यादव को सीधे पति के रूप में संबोधित क्यों नहीं किया। राजनीतिक विरोधी इसे भावनात्मक दूरी से जोडक़र देख रहे हैं, जबकि समर्थक इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मामला बता रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और बड़ा सवाल तेजी से उठ रहा है यदि प्रतीक यादव लंबे समय से बीमार थे, तो उस दौरान अपर्णा यादव कहां थीं? पति के बीमार होने के समय उसे सबसे ज्यादा जरूरत अपनी पत्नी की होती है मां साधना की मौत के बाद प्रतीक बिल्कुल अकेले से पड़ गए थे सूत्रों की माने तो उन्हें घर में ही कैद रहने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा था। यहां तक की घर के सभी सेवक भी अमन विष्ट द्वारा ही रखे गए थे घटना के दिन भी घर पर अमन बिष्ट और उनकी मां अम्बी बिष्ट ही मौजूद थीं । विपक्षी खेमे और सोशल मीडिया यूजर्स दावा कर रहे हैं कि बीमारी के दौरान अपर्णा भाजपा के चुनावी और राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई दे रही थीं।
हालांकि अब तक अपर्णा यादव की ओर से इन सवालों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि हाई-प्रोफाइल परिवारों में निजी संबंधों और सार्वजनिक छवि के बीच अक्सर बड़ा अंतर होता है, लेकिन जब मामला मौत और संवेदनशील पारिवारिक परिस्थितियों का हो, तब हर सार्वजनिक संकेत चर्चा का विषय बन जाता है।
फिलहाल प्रतीक यादव की मौत सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं रह गई है। यह मामला अब राजनीति, रिश्तों, सार्वजनिक छवि और रहस्यमयी सवालों के ऐसे जाल में फंसता दिखाई दे रहा है, जहां हर नया बयान और हर नई चुप्पी अपने आप में एक नई बहस को जन्म दे रही है।
अपर्णा के शोक संदेश से लेकर उनके चुनाव प्रचार तक चर्चा तेज


