यूथ इंडिया संवाददाता
लखनऊ। समाजवादी परिवार से जुड़े कारोबारी और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव की मौत अब सिर्फ एक पारिवारिक शोक नहीं, बल्कि कई सवालों से घिरा बड़ा रहस्य बनती जा रही है। जिस तरह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर वर्षों तक सवाल उठते रहे, उसी तरह अब प्रतीक यादव की मौत पर भी राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक सवालों का तूफान खड़ा हो गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मौत घर पर हुई थी और परिवार के तमाम सदस्य मौजूद थे, तब आखिर पोस्टमार्टम की जरूरत क्यों पड़ी? सूत्रों के मुताबिक शुरुआती स्तर पर मौत को स्वाभाविक बताया गया, लेकिन बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। आखिर ऐसा क्या था जिसने प्रशासन को पोस्टमार्टम कराने पर मजबूर किया? क्या किसी मेडिकल या कानूनी आशंका ने सिस्टम को सतर्क किया?
इस पूरे मामले में दूसरा बड़ा सवाल अस्पताल को लेकर खड़ा हो रहा है। करोड़ों के कारोबार से जुड़े बड़े बिजनेसमैन प्रतीक यादव को किसी सुपर स्पेशियलिटी निजी अस्पताल या कॉर्पोरेट हेल्थ सेंटर में ले जाने के बजाय सरकारी सिविल अस्पताल क्यों ले जाया गया? आखिर उस समय निर्णय किसने लिया? क्या हालत इतनी गंभीर थी कि समय नहीं मिला, या फिर कहानी में कोई ऐसा मोड़ है जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा?
राजनीतिक गलियारों में भी यह मामला तेजी से गरमा रहा है। बिहार के चर्चित सांसद पप्पू यादव ने मौत की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। वहीं समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कराने की मांग कर दी है। दोनों नेताओं का कहना है कि जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की अफवाह या शक की राजनीति खत्म हो सके।
मामला अब मानवाधिकार के दायरे तक पहुंच गया है। एक सामाजिक संगठन ने नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने की अपील की है। शिकायत में कहा गया है कि मौत से जुड़े कई पहलुओं पर अभी तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है और पारदर्शिता जरूरी है।
सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं। कोई इसे हाई-प्रोफाइल मौत का रहस्य बता रहा है तो कोई मेडिकल प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर रहा है। कई यूजर्स पूछ रहे हैं कि यदि मौत सामान्य थी तो मेडिकल प्रक्रिया इतनी असामान्य क्यों दिखी? वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक संवेदनशीलता से जोडक़र देख रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी व्यक्ति की घर पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने पर पोस्टमार्टम कराना सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, खासकर जब मामला हाई-प्रोफाइल हो। लेकिन सवाल तब उठते हैं जब घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आने लगें और आधिकारिक बयान पूरी तरह स्पष्ट न हों।
फिलहाल प्रतीक यादव की मौत को लेकर जितने जवाब सामने आए हैं, उससे कहीं ज्यादा सवाल पैदा हो चुके हैं। सत्ता, राजनीति, परिवार और सिस्टम के बीच घूमती यह कहानी अब अंसुलझी पहेली बन चुकी है। क्या सच कभी पूरी तरह सामने आएगा या फिर यह मामला भी देश की उन रहस्यमयी मौतों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा जिनकी फाइलें समय के साथ धूल खाती रह जाती हैं यही सवाल आज हर जुबान पर है।
मौत बनी रहस्य! घर पर हुई मौत के बाद पोस्टमार्टम क्यों? आखिर किस सच को दबाया जा रहा है?


