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Tuesday, May 12, 2026

मंदिरों के पास शराब पर चला विजय सरकार का बुलडोजर, तमिलनाडु में 717 दुकानें बंद करने का आदेश

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चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में नई पारी शुरू करते ही मुख्यमंत्री सी . जोसफ विजय ने ऐसा फैसला लिया है जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। राज्य सरकार ने मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों, स्कूल-कॉलेजों और बस स्टैंडों के आसपास संचालित 717 TASMAC शराब दुकानों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। विजय सरकार के इस फैसले को सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

सरकारी आदेश के मुताबिक धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर दायरे में चल रही शराब दुकानों को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा। प्रशासन को दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री विजय ने साफ संदेश दिया है कि तमिलनाडु में अब “राजस्व से ज्यादा सामाजिक वातावरण” को प्राथमिकता दी जाएगी।

तमिलनाडु में TASMAC शराब दुकानों को लेकर लंबे समय से विवाद चलता रहा है। कई जिलों में महिलाओं और स्थानीय लोगों ने मंदिरों व स्कूलों के पास शराब बिक्री के खिलाफ आंदोलन किए थे। आरोप लगते रहे कि शराब दुकानों की वजह से धार्मिक स्थलों की गरिमा प्रभावित हो रही थी और छात्र-छात्राओं पर भी गलत असर पड़ रहा था। अब विजय सरकार ने सत्ता संभालते ही इस मुद्दे पर बड़ा दांव खेल दिया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बंद होने वाली दुकानों में 276 दुकानें धार्मिक स्थलों के आसपास, 186 स्कूल-कॉलेजों के निकट और 255 बस स्टैंड क्षेत्रों में संचालित हो रही थीं। फिलहाल तमिलनाडु में करीब 4,765 TASMAC दुकानें संचालित हैं, जिनसे हर साल सरकार को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। ऐसे में यह फैसला आर्थिक दृष्टि से भी बड़ा माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को विजय की “सॉफ्ट सोशल पॉलिटिक्स” के रूप में देखा जा रहा है। फिल्मी पर्दे से राजनीति में आए विजय ने अपने पहले बड़े फैसले से यह संकेत देने की कोशिश की है कि उनकी सरकार सामाजिक मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाएगी। विपक्षी दल भी इस फैसले पर खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि शराब दुकानों का मुद्दा लंबे समय से जनता की नाराजगी का कारण बना हुआ था।
महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। कई संगठनों का कहना है कि अगर इसी तरह चरणबद्ध तरीके से शराब दुकानों पर नियंत्रण किया गया तो अपराध और घरेलू हिंसा जैसी घटनाओं में भी कमी आ सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि विजय सरकार आने वाले दिनों में शराब नीति को लेकर और कितने सख्त कदम उठाती है।

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