– निजी स्कूलों पर बड़ा शिकंजा
– एनसीईआरटी किताबें अनिवार्य
– 50 से ज्यादा स्कूलों के 3 साल के रिकॉर्ड की जांच शुरू
मुरादाबाद। जिलाधिकारी डॉ . राजेंद्र पेंसिया ने निजी स्कूलों की मनमानी, बढ़ती फीस और शिक्षा के व्यवसायीकरण के खिलाफ ऐसा सख्त रुख अपनाया है, जिसकी पूरे मंडल में चर्चा हो रही है। डीएम ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि जिले में किसी भी कीमत पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हर हाल में एनसीईआरटी की किताबें ही लागू कराई जाएंगी।
डीएम के तेवर उस समय और कड़े दिखाई दिए जब उन्होंने आधा सैकड़ा से अधिक निजी विद्यालयों के पिछले तीन वर्षों के फीस रिकॉर्ड, किताबों की खरीद, यूनिफॉर्म और अन्य शुल्कों की जांच के आदेश दे दिए। प्रशासनिक हलकों में इसे अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार कई स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें खरीदने और हर वर्ष फीस में भारी बढ़ोतरी करने के आरोप लगातार प्रशासन तक पहुंच रहे थे। इसके बाद डीएम ने शिक्षा विभाग और प्रशासनिक टीमों को विस्तृत जांच के निर्देश दिए।
“बच्चों की शिक्षा व्यापार नहीं बन सकती”
डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, इसे व्यापार में बदलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में नियमों के विपरीत फीस वृद्धि या किताबों की जबरन बिक्री पाई जाए, वहां कठोर कार्रवाई की जाए।
जिले में इस कार्रवाई के बाद निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। कई विद्यालय अब अपने शुल्क ढांचे और किताबों की सूची की समीक्षा में जुट गए हैं। वहीं अभिभावकों के बीच डीएम के इस कदम को लेकर भारी संतोष दिखाई दे रहा है।
गौवंश संरक्षण के लिए भावुक अपील, एक दिन का वेतन देने की बात
कड़क प्रशासनिक फैसलों के बीच डीएम का संवेदनशील और धार्मिक पक्ष भी चर्चा में है। गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर आयोजित बैठक में डॉ. पेंसिया ने अधिकारियों और कर्मचारियों से भावुक अपील करते हुए एक दिन का वेतन गोवंश संरक्षण कोष में देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व भी है। सूत्रों के मुताबिक डीएम की इस अपील का प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर गहरा असर पड़ा और कई लोगों ने स्वेच्छा से सहयोग की सहमति जताई।
धर्म, अध्यात्म और प्रशासन का अनोखा संतुलन
मुरादाबाद प्रशासनिक गलियारों में डॉ. राजेंद्र पेंसिया की पहचान केवल सख्त डीएम के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे अधिकारी के रूप में भी बन रही है जो धर्म, अध्यात्म और सामाजिक मूल्यों को प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़कर देखते हैं।
चाहे गौ संरक्षण अभियान हो, धार्मिक आयोजनों की व्यवस्थाएं हों या जनकल्याण योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन,डीएम लगातार सक्रिय भूमिका में दिखाई देते हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि वह सरकार की योजनाओं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
“कड़क डीएम” की छवि से बढ़ा प्रशासनिक दबाव
मुरादाबाद में लगातार निरीक्षण, बैठकों में सख्त समीक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की शैली ने प्रशासनिक तंत्र में स्पष्ट संदेश दिया है कि अब लापरवाही और मनमानी आसान नहीं होगी।
शिक्षा माफिया, अवैध वसूली और नियमों की अनदेखी पर डीएम की सख्ती ने आम लोगों के बीच प्रशासन की छवि मजबूत की है। वहीं सरकार समर्थक वर्ग इसे “गुड गवर्नेंस मॉडल” का हिस्सा मान रहा है।
फिलहाल मुरादाबाद में डॉ. राजेंद्र पेंसिया की कार्यशैली को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि वह केवल आदेश देने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि फील्ड में उतरकर फैसलों को लागू कराने वाले प्रशासनिक चेहरा बन चुके हैं।


