यूपी, एमपी और राजस्थान की संयुक्त रणनीति, चंबल में खनन को “गंभीर अपराध” मानने की तैयारी
आगरा । चंबल क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय अवैध खनन माफियाओं पर अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। यूपी, मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारें मिलकर चंबल में अवैध खनन को रोकने के लिए विशेष कानूनी और प्रशासनिक ढांचा तैयार करने जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक अवैध खनन से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष कोर्ट गठित करने पर गंभीर मंथन चल रहा है।
बताया जा रहा है कि चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन को अब सामान्य आर्थिक अपराध नहीं बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता पर हमला मानते हुए “बड़ा अपराध” घोषित करने की तैयारी है। तीनों राज्यों के अधिकारियों के बीच इस संबंध में कई दौर की चर्चा हो चुकी है और जल्द बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
सूत्रों के अनुसार खनन माफियाओं पर नकेल कसने के लिए संयुक्त विशेष टीम भी बनाई जाएगी, जिसमें पुलिस, खनन विभाग, वन विभाग और पर्यावरण एजेंसियों के अधिकारी शामिल रहेंगे। यह टीम अंतरराज्यीय नेटवर्क, अवैध परिवहन और संरक्षण तंत्र पर सीधी कार्रवाई करेगी।
चंबल नदी क्षेत्र लंबे समय से अवैध खनन की वजह से पर्यावरणीय संकट झेल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अवैध खनन से नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है, जिससे दुर्लभ जलीय जीवों और पक्षियों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। घड़ियाल, डॉल्फिन और कई प्रवासी पक्षियों के आवास क्षेत्र पर भी इसका गंभीर असर बताया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासनिक रिपोर्टों में भी यह सामने आया है कि खनन माफिया आधुनिक मशीनों और हथियारबंद नेटवर्क के जरिए रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर अवैध खनन करते हैं। कई बार पुलिस और प्रशासनिक टीमों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि अब सरकारें चंबल क्षेत्र को लेकर “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाने के मूड में हैं। विशेष कोर्ट बनने के बाद खनन माफियाओं के मामलों की त्वरित सुनवाई और कठोर सजा सुनिश्चित करने की योजना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तीनों राज्यों की संयुक्त रणनीति प्रभावी ढंग से लागू हुई तो चंबल क्षेत्र में अवैध खनन नेटवर्क को बड़ा झटका लग सकता है। हालांकि माफियाओं की गहरी पकड़ और राजनीतिक संरक्षण की चर्चाओं को देखते हुए इस कार्रवाई को चुनौतीपूर्ण भी माना जा रहा है।


