ममता, त्याग और संघर्ष की वह अनंत शक्ति जिसके बिना जीवन अधूरा है
शरद कटियार
जब भी संसार में सबसे पवित्र रिश्तों की बात होती है, तब सबसे पहले जिस शब्द की गूंज दिल और आत्मा तक सुनाई देती है, वह शब्द है “माँ”। यह केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि वह भावना है जिसमें पूरा जीवन समाया हुआ है। माँ वह शक्ति है जो बच्चे को जन्म देने से पहले ही उसके लिए सपने बुनना शुरू कर देती है। वह केवल शरीर को जन्म नहीं देती, बल्कि संस्कार, संवेदनाएं और इंसानियत भी गढ़ती है। शायद इसी लिए कहा जाता है कि ईश्वर हर जगह स्वयं मौजूद नहीं रह सकता था, इसलिए उसने माँ को बनाया।
माँ का प्रेम इस दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रेम है जिसमें कोई स्वार्थ नहीं होता। वह अपने बच्चे के चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए हर दर्द सह लेती है। बच्चे की छोटी सी चोट उसकी आंखों में आंसू ला देती है, जबकि अपनी तकलीफों को वह अक्सर मुस्कुराकर छिपा लेती है। एक माँ के जीवन का सबसे बड़ा सुख उसके बच्चों की खुशी होती है। वह अपनी इच्छाएं, अपने सपने और कभी-कभी पूरा जीवन तक परिवार के लिए समर्पित कर देती है।
माँ वह पहली शिक्षक होती है जो बच्चे को बोलना, चलना, संस्कार और जीवन जीने का तरीका सिखाती है। दुनिया की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी भी वह शिक्षा नहीं दे सकती जो एक माँ अपनी गोद में बैठाकर देती है। बच्चे के अंदर अच्छे-बुरे की पहचान, दूसरों के प्रति सम्मान और संघर्ष से लड़ने की ताकत सबसे पहले माँ ही पैदा करती है।
इतिहास गवाह है कि महान व्यक्तियों की सफलता के पीछे उनकी माँ का संघर्ष और संस्कार छिपा रहा है। चाहे छत्रपति शिवाजी महाराज हों, स्वामी विवेकानंद हों या डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, सभी ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माँ को दिया। माँ केवल एक परिवार नहीं संभालती, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के भविष्य को तैयार करती है।
आज का आधुनिक दौर तेजी से बदल रहा है। संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं और व्यस्त जीवनशैली के बीच लोग भावनात्मक रूप से अकेले होते जा रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच अगर कोई रिश्ता आज भी बिना शर्त साथ खड़ा है, तो वह माँ का रिश्ता है। वह हर परिस्थिति में अपने बच्चों के लिए ढाल बनकर खड़ी रहती है। चाहे बेटा असफल हो जाए, पूरी दुनिया उसके खिलाफ हो जाए, लेकिन माँ का विश्वास कभी कमजोर नहीं पड़ता।
मदर्स डे केवल सोशल मीडिया पोस्ट या औपचारिक शुभकामनाओं का दिन नहीं होना चाहिए। यह दिन उस त्याग को याद करने का दिन है जिसे अक्सर लोग सामान्य मान लेते हैं। एक माँ रातभर जागकर बच्चे की देखभाल करती है, परिवार के लिए अपनी खुशियों का त्याग करती है और बिना किसी शिकायत के जीवनभर जिम्मेदारियां निभाती रहती है। लेकिन दुखद सच्चाई यह भी है कि आधुनिक समाज में कई वृद्ध माताएं अकेलेपन और उपेक्षा का दर्द झेल रही हैं। जिन बच्चों के लिए उन्होंने पूरा जीवन समर्पित कर दिया, वही बच्चे कई बार उन्हें समय तक नहीं दे पाते।
आज जरूरत केवल मदर्स डे मनाने की नहीं, बल्कि अपनी माँ को सम्मान और समय देने की है। उनके त्याग को समझने की है। उन्हें यह एहसास दिलाने की है कि वे हमारे जीवन की सबसे बड़ी ताकत हैं। क्योंकि जब माँ साथ होती है तो इंसान दुनिया की सबसे बड़ी मुश्किलों से भी लड़ने का साहस रखता है।
माँ की ममता किसी धर्म, जाति या भाषा की मोहताज नहीं होती। वह हर रूप में केवल प्रेम और करुणा का प्रतीक होती है। उसकी दुआ में वह ताकत होती है जो टूटे हुए इंसान को फिर खड़ा कर देती है। उसकी गोद में वह सुकून होता है जो दुनिया की किसी दौलत में नहीं मिल सकता।
सच तो यह है कि माँ केवल एक रिश्ता नहीं…वह जीवन की पहली धड़कन, पहला विश्वास, पहली दुआ और पहला भगवान होती है।


