– गायत्री नर्सिंग होम सील होने से अवैध अस्पतालों में दहशत
– कई पर घूमी प्रशासन की नजर
– एमबीबीएस डॉक्टर होने के कारण स्वास्थ्य नियमों की गहरी समझ
– मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ पर डीएम का सख्त रुख
फर्रुखाबाद।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे मानकविहीन और संदिग्ध अस्पतालों के खिलाफ अब प्रशासन पूरी तरह आक्रामक मोड में दिखाई दे रहा है। कादरी गेट क्षेत्र स्थित गायत्री नर्सिंग होम को गर्भवती महिला की मौत के बाद सील किए जाने की कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि अब मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस पूरी कार्रवाई के पीछे जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की सख्त कार्यशैली और स्वास्थ्य मामलों की गहरी समझ को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।
विशेष बात यह है कि डीएम डॉ. अंकुर लाठर स्वयं एमबीबीएस डॉक्टर हैं। चिकित्सा क्षेत्र की तकनीकी और कानूनी बारीकियों की उन्हें गहन जानकारी है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों में वे केवल प्रशासनिक अधिकारी की तरह नहीं बल्कि चिकित्सा विशेषज्ञ की गंभीरता के साथ निर्णय लेते दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार डीएम ने साफ संदेश दिया है कि फर्रुखाबाद में मरीजों की जिंदगी को “व्यापार” बनाकर नियमों की अनदेखी करने वाले अस्पताल किसी भी कीमत पर नहीं चलने दिए जाएंगे।
गौरतलब है कि कम्पिल थाना क्षेत्र के गांव रसीदपुर निवासी गर्भवती महिला की ऑपरेशन के दौरान मौत के बाद परिजनों ने गायत्री नर्सिंग होम पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। मामला तूल पकड़ने के बाद पहले ऑपरेशन थिएटर सील किया गया और फिर जांच रिपोर्ट के आधार पर पूरे नर्सिंग होम को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान चार मरीजों को लोहिया अस्पताल में शिफ्ट कराया गया।
सीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार की जांच में सामने आया कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थायी उपलब्धता नहीं थी। अधिकांश डॉक्टर “ऑन कॉल” बुलाए जाते थे और रिकॉर्ड में केवल एक बीएमएस चिकित्सक दर्ज मिला। इसके अलावा बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण और अन्य स्वास्थ्य मानकों में भी गंभीर खामियां पाई गईं।
सूत्रों के मुताबिक डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों की गहन जांच की जाए। खासतौर पर मसेनी चौराहा, आवास विकास और शहर के अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में तेजी से खुले अस्पताल प्रशासन के रडार पर बताए जा रहे हैं। वर्षों से बिना पर्याप्त संसाधनों, प्रशिक्षित स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टरों के संचालित हो रहे कई अस्पताल अब जांच के घेरे में आ सकते हैं।
जनता के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि पहली बार जिले में ऐसा डीएम आया है जिसे चिकित्सा व्यवस्था की तकनीकी सच्चाइयों की पूरी जानकारी है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई अब केवल कागजी नहीं बल्कि जमीनी दिखाई दे रही है। आम लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह सख्ती जारी रही तो फर्रुखाबाद में फर्जी और मानकविहीन अस्पतालों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब हो सकता है।
फर्रुखाबाद में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे खेल पर अब एक डॉक्टर डीएम की नजर है। डॉ. अंकुर लाठर की सख्ती ने साफ कर दिया है कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के लिए जिले में अब जगह कम पड़ने वाली है।
अस्पताल माफिया पर डीएम डॉ. अंकुर लाठर का चलेगा बड़ा प्रहार


