कौन हूँ मैं,
मीठी वाणी या कर्कश वाणी,
स्वयं को ही न समझ पायी
लोगों के अनुसार चलूँ तो मीठी वाणी,
और प्रतिकूल चलूँ तो कर्कश वाणी
सबका भला देखूँ तो कलकंद वाणी,
और अपना भला देखूँ तो तीखी वाणी,
शब्द एक है पर रूप अनेक है,
समझो तो मीठी वाणी, नहीं तो कर्कश वाणी
वाणी रूप मे, मैं ठहरी आत्मा रूपी मनुष्य
देखा भला सबका फिर भी कहलाई कर्कश वाणी,
लोगों के मन की बात पूरी कर दी,
फिर भी मैं कहलाई स्वार्थी वाणी
शब्द मे कमी या फिर मुझमे कमी समझ न पाई,
अंत मे समझी, शब्द भी तो है लोगों के मन की वाणी
अर्थात कमी निकली लोगों में क्यूंकि,
मैं तो ठहरी अदृश्य वाणी |
Name – Vani katiyar
Class – BSc 1 year
College- रामकृष्ण महाविद्यालय ranukhheda


