कोलकाता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होता दिख रहा है। राज्य में करीब 93 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान हुआ, जो अब तक के चुनावी इतिहास में अभूतपूर्व माना जा रहा है। खास बात यह रही कि चुनाव आयोग द्वारा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मतदान के लिए बाहर निकलना राजनीतिक दलों के लिए चौंकाने वाला रहा। सोमवार सुबह जैसे ही मतगणना शुरू हुई और शुरुआती रुझान सामने आए, वैसे ही राज्य की सियासत में बड़ा उलटफेर नजर आने लगा। रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ती दिखाई दी, जबकि वर्ष 2011 से लगातार सत्ता में बनी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 100 सीटों के आंकड़े से नीचे सिमटती नजर आई।
रिकॉर्ड वोटिंग ने बदले राजनीतिक समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार का मतदान प्रतिशत सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि जनभावनाओं का संकेत है। मतदान के दौरान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। लंबी कतारों में खड़े मतदाताओं ने लोकतंत्र में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। महिलाओं, युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की बड़ी भागीदारी ने चुनाव को और भी रोचक बना दिया। यही कारण है कि मतदान के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से इस भारी वोटिंग की व्याख्या करते नजर आए।
भाजपा का दावा—‘हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण’
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने मतदान के बाद ही सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर दावा किया था कि इस बार का भारी मतदान हिंदू मतदाताओं के एकजुट होने का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में परंपरागत रूप से मुस्लिम मतदाता तृणमूल कांग्रेस के साथ रहते हैं, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में हिंदू मतदाता भाजपा के पक्ष में लामबंद हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव से पहले मालदा, मुर्शिदाबाद, संदेशखाली और आरजी कर जैसी घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, जिससे आम जनता के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हुई। इन घटनाओं ने मतदाताओं को बदलाव के लिए प्रेरित किया।
सुवेंदु अधिकारी का बड़ा बयान—‘परिवर्तन की लहर’
नंदीग्राम सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुरुआती रुझानों के बाद कहा कि उन्हें उम्मीद से तीन गुना अधिक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि “यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि जनता की भावनाओं का विस्फोट है।”
उन्होंने आगे कहा कि राज्य में हिंदू मतदाता एकजुट होकर परिवर्तन के लिए वोट कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम वोट इस बार अलग-अलग दलों में बंटते नजर आ रहे हैं। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया है।
सीएम योगी के भाषणों का दिखा असर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल में कई रैलियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने भाषणों में कानून-व्यवस्था, धार्मिक पहचान और सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
माथाभांगा, धुपगुड़ी और राजारहाट जैसे क्षेत्रों में आयोजित रैलियों में उन्होंने टीएमसी सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि “बंगाल में अब बदलाव तय है।” उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार बनने पर राज्य में भयमुक्त वातावरण स्थापित किया जाएगा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
उनके ‘जय श्रीराम’ और ‘बुलडोजर’ जैसे बयान चुनावी विमर्श का केंद्र बने रहे।
ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया—‘अभी खेल बाकी है’
राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुरुआती रुझानों के बाद संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और पोलिंग एजेंट्स से अपील की कि वे मतगणना केंद्रों पर डटे रहें और अंतिम नतीजों का इंतजार करें।
उन्होंने कहा कि अभी कई राउंड की गिनती बाकी है और चुनाव परिणाम किसी भी दिशा में जा सकते हैं। हालांकि, भाजपा की बढ़त से पार्टी कार्यकर्ताओं में चिंता साफ झलक रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा समर्थकों में जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है।
सांप्रदायिक और सामाजिक मुद्दे बने चुनावी फैक्टर
इस चुनाव में कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक तनाव, महिलाओं की सुरक्षा और पलायन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। संदेशखाली और अन्य घटनाओं ने चुनावी माहौल को काफी प्रभावित किया। भाजपा ने इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाया, जबकि टीएमसी ने विकास और कल्याणकारी योजनाओं को अपना मुख्य एजेंडा बनाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाताओं ने इस बार ‘सुरक्षा, सम्मान और जवाबदेही’ को ध्यान में रखते हुए मतदान किया है।
अन्य राज्यों में भी बदले समीकरण
देश के अन्य राज्यों में भी चुनावी
नतीजे दिलचस्प मोड़ लेते नजर आए—
असम: भाजपा 78 सीटों पर बढ़त बनाकर प्रचंड जीत की ओर अग्रसर
केरल: कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन स्पष्ट बहुमत की ओर
पुडुचेरी: एन. रंगास्वामी ने थट्टांचावडी सीट से बड़ी जीत दर्ज की
वामपंथ की चिंता: डी राजा ने बंगाल में कमजोर प्रदर्शन पर गंभीर चिंता जताई
राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा व्यापक असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनाती है, तो यह सिर्फ एक राज्य का बदलाव नहीं होगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा प्रभाव डालेगा। इससे भाजपा को पूर्वी भारत में मजबूती मिलेगी और विपक्षी दलों के सामने नई चुनौती खड़ी होगी।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों के लिए यह चुनाव आत्ममंथन का बड़ा अवसर बन सकता है।


