याद से आगे आज वे दिन, स्कूल थे जाते टेंशन बिन
गुरु जनों से डर के रहते, इकले में ये सोचा करते
बडे होंगे तब मौज करेंगे, खुद की जिंदगी खुद ही जियेंगे
पर वे दिन अब याद सताते, वस्ता ले जब पढ़ने जाते
कोई गुरू जी मार लगाते, कोई गरु जी लाड लडाले
छुट्टी में घर दौड़ लगाते, अगले दिन फिर मौज से आते
सपने से रह गए वे दिन, अब सोचा करते तारे गिन
याद से आगे आज वे दिन. स्कूल थे जाते टेंशन बिन…

हंसी ठिठौली रोज थी होती, बीच रोड पर टोली चलती
नहीं किसी का कोई भी डर था वही समय था सबसे अच्छा
टिफिन को आधा-आधा खाते यारों के संग स्वप्न सजाते
मैदानों में भीड़ लगाते, चंदा कर सब गेंद थे लाते
दफ्तर में बीते अब दिन, खुशी गई है मुख से छिन
याद से आगे आज वे दिन. स्कूल थे जाते टेंशन बिन….

हुई स्कूल छोड़ जवान जिंदगी, हो गई अब वीरान जिंदगी
मिलते थे जो संडे दिन भी, कर गई मीलों दूर जिंदगी
जिम्मेदारी इतनी बढ़ गई, जिंदगी के आड़े अड़ गई
जो कहते थे सांझ मिलेंगे, अब कहते हैं काल मिलेंगे
ना जाने किस साल मिलेंगे, ना जाने किस हाल मिलेंगे
कटे काटते नहीं हैं दिन, सोचो तो चुभे दिल में पिन
याद से आगे आज वे दिन. स्कूल थे जाते टेंशन बिन….
सूर्या अग्निहोत्री
(डिप्टी एडिटर यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप)

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