प्रयागराज/मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश में जमीन और संस्थानों को लेकर चल रहे विवादों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम और सख्त फैसला सुनाया है। मुरादाबाद के दिल्ली रोड स्थित मंगूपुरा इलाके में करोड़ों रुपये की विवादित भूमि पर मदरसा जामिया अरबिया हायतुल उलूम की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को अधिग्रहण की पूरी छूट दे दी है।
हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया कि विकास कार्यों में कानूनी अड़चनें डालने वाली याचिकाओं को अब राहत मिलना आसान नहीं होगा। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि संबंधित भूमि पर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई विधिसम्मत है और इसमें किसी प्रकार का अवैध हस्तक्षेप नहीं पाया गया।
सूत्रों के मुताबिक, मंगूपुरा क्षेत्र की यह जमीन लंबे समय से विवादों में घिरी थी, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इस भूमि पर विकास प्राधिकरण की योजना के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसे मदरसे की ओर से कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका में अधिग्रहण को अवैध और नियमों के खिलाफ बताया गया था, लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
इस फैसले के बाद अब मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासनिक हलकों में इसे एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि अब सरकारी परियोजनाओं में बाधा डालने वाले मामलों में न्यायालय सख्ती दिखा रहा है।
बड़ा फैसला: मदरसे की याचिका खारिज, करोड़ों की जमीन पर अधिग्रहण की खुली छूट


