नई दिल्ली
महिला अधिवक्ता पर हुए कथित बर्बर हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस को कई सख्त निर्देश जारी किए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाए और बेहतर होगा कि जांच अधिकारी महिला हो, जो एसीपी या डीसीपी रैंक की हो।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को जानकारी दी कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मुख्य आरोपी, पीड़िता के पति मनोज कुमार को 25-26 अप्रैल की दरम्यानी रात गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी सोनिआ विहार का निवासी है और उसे खजुरी खास इलाके से पकड़ा गया। आरोप है कि उसने 22 अप्रैल को पारिवारिक विवाद के चलते अपनी 38 वर्षीय पत्नी पर चाकू से हमला किया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान एक अन्य गंभीर मुद्दे पर भी चिंता जताई। पीठ ने दिल्ली सरकार और पुलिस को निर्देश दिया कि यह जांच की जाए कि घायल महिला को तीन अलग-अलग अस्पतालों ने भर्ती करने से कथित रूप से इनकार क्यों किया। कोर्ट ने कहा कि गंभीर हालत में किसी पीड़ित को समय पर इलाज न मिलना अत्यंत चिंताजनक है और इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
इसके अलावा अदालत ने उस आरोप पर भी संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया है कि पीड़िता के ससुराल पक्ष दो नाबालिग बच्चों को अपने साथ ले गया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि बच्चों का तत्काल पता लगाकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। फिलहाल पुलिस घरेलू विवाद समेत सभी पहलुओं से मामले की गहन जांच कर रही है।


