15 दिन में सात बार पिटी पुलिस, कहीं फाड़ी वर्दी तो कहीं जवानों को पीटा
कानपुर
कमिश्नरी पुलिस व्यवस्था की साख पर लगातार हमले हो रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बीते महज 15 दिनों में पुलिसकर्मियों पर सात जानलेवा हमले हो चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये हमले किसी शातिर अपराधी गैंग ने नहीं, बल्कि आम नागरिकों द्वारा किए गए कहीं शराब के नशे में, तो कहीं मामूली कार्रवाई जैसे चालान या गाड़ी हटाने की बात पर।
स्थिति यह है कि कानून की रक्षा करने वाले पुलिसकर्मी अब खुद सड़कों पर असुरक्षित नजर आ रहे हैं। कई घटनाओं में जवानों की वर्दी फाड़ दी गई, उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया और खुलेआम पथराव तक किया गया। इससे न सिर्फ पुलिस का मनोबल गिर रहा है, बल्कि आम जनता के बीच कानून व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बीते दिनों की घटनाएं हालात की गंभीरता खुद बयां कर रही हैं—
23 अप्रैल को कैंट क्षेत्र में शुक्लागंज नए गंगापुल पर एक कार सवार ने ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर रमेश कुमार सरोज को कुचलने की कोशिश की। 21 अप्रैल को घंटाघर चौराहे पर चालान करने से नाराज टेंपो चालक और उसके साथियों ने पुलिस बूथ पर पथराव कर दिया। 20 अप्रैल को बिठूर के टिकरा में चेकिंग के दौरान बोलेरो सवार ने दरोगा प्रदीप सिंह को कुचलने का प्रयास किया और एक कारोबारी की जान चली गई।
19 अप्रैल को हर्ष नगर में डायल 112 पर तैनात कांस्टेबल धीरेंद्र कुमार का सिर फोड़ दिया गया और उनकी वर्दी फाड़ दी गई, जबकि उसी दिन गुमटी क्षेत्र में ट्रैफिक सिपाही राकेश मिश्रा को सड़क पर खड़ी कार हटाने को कहने पर बेरहमी से पीटा गया। इससे पहले 11 अप्रैल को नरवल के पाली गांव में पुलिस टीम को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया और चौकी फूंकने की धमकी दी गई।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि अपराधियों ही नहीं, अब आम लोगों के बीच भी कानून का डर कम होता जा रहा है। पुलिस इन मामलों में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को जेल भेज रही है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर पुलिस की साख और सुरक्षा कब बहाल होगी?
अगर हालात पर जल्द सख्त नियंत्रण नहीं किया गया, तो कानून व्यवस्था पर इसका असर और गहरा हो सकता है।


