हमीरपुर जनपद के राठ स्थित विधायक आवास पर रविवार को संविदा पर कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों ने विधायक मनीषा अनुरागी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के लगभग 36 हजार ग्राम रोजगार सेवकों को नियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा देने सहित 10 सूत्रीय मांगें रखीं।
ग्राम रोजगार सेवक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष किरन सिंह ने बताया कि प्रदेश के रोजगार सेवक वर्ष 2006 से मनरेगा योजना के तहत पिछले 19 वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे हैं। उनका मानदेय मनरेगा की प्रशासनिक मद से दिया जाता है, लेकिन इसमें लगातार देरी की समस्या बनी रहती है।
रोजगार सेवकों ने कहा कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना है, जिसमें प्रत्येक ग्राम पंचायत का कार्यक्षेत्र अलग होता है, जिसके कारण भुगतान में अनियमितता और देरी होती है। उन्होंने मांग की कि मानदेय का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि यह हर कर्मचारी का अधिकार है।
उन्होंने यह भी बताया कि रोजगार सेवक ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनके जॉब चार्ट में केवल मनरेगा से जुड़े कार्य ही शामिल हैं। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री की 1 अक्टूबर 2021 की घोषणा के अनुरूप जॉब चार्ट में अन्य विभागीय कार्य भी जोड़े जाएं।
इसके अलावा, रोजगार सेवकों ने बताया कि उनका 12 से 14 महीने का मानदेय बकाया है, जिसे जल्द जारी किया जाए। साथ ही उन्हें विभागीय कर्मचारी घोषित करने, न्याय पंचायत स्तर पर स्थानांतरण व्यवस्था लागू करने और मृतक आश्रितों के परिवारों को सेवा देने की भी मांग की गई।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो वे 9 मई 2026 को बैठक कर विधानसभा घेराव जैसे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिवकुमार, महेंद्र राजपूत, प्रतीम सिंह, रघुवीर सिंह, सुखनंदन, आशा, अर्चना, मुन्नी देवी, ऊषा देवी, सुनीता सहित बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहे।


