– 2018–2020 का काला खेल उजागर
लखनऊ। राजधानी की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की आड़ में करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। ऑडिट में सामने आई भारी वित्तीय अनियमितताओं के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी जितेन्द्र कुमार गोंड ने सख्त रुख अपनाते हुए 6 पंचायत सचिवों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। मामला 2018 से 2020 के बीच हुए खर्चों से जुड़ा है, जिसमें कागजों पर काम दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की गई।
जांच में सामने आया कि गोसाईगंज ब्लॉक की रतियामऊ पंचायत, कपेरामदारपुर और घुसकर में विकास कार्यों के नाम पर बड़ी हेराफेरी की गई। वहीं माल ब्लॉक के रहटा, नारायनपुर और सैदापुर पंचायतों में भी भारी गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। इसके अलावा बक्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र की गोधना, सरसवां और मलिहाबाद पंचायतें भी जांच के दायरे में हैं, जहां रिकॉर्ड और खर्च के बीच गंभीर अंतर सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, ऑडिट टीम ने जब संबंधित पंचायतों से अभिलेख और खर्च का ब्यौरा मांगा तो न तो दस्तावेज उपलब्ध कराए गए और न ही नोटिस का कोई संतोषजनक जवाब दिया गया। कई मामलों में अनुपालन आख्या तक जमा नहीं की गई, जिससे गड़बड़ी और गहरी हो गई।
जिला पंचायत राज अधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि जिन मामलों में वसूली नोटिस का जवाब नहीं दिया गया, उन्हें सीधे गबन मानते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। संबंधित सचिवों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है।
प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, इन पंचायतों में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का दुरुपयोग हुआ है। कई विकास कार्य—जैसे सड़क निर्माण, नाली, शौचालय और सामुदायिक भवन—या तो अधूरे मिले या जमीन पर उनका कोई अस्तित्व ही नहीं मिला, जबकि कागजों में भुगतान पूरा दिखाया गया।
यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है। सरकार जहां गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का दावा कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की ये परतें उस दावे को कमजोर कर रही हैं।
पंचायत घोटाला: विकास के नाम पर करोड़ों की लूट, 6 सचिवों पर एफआईआर के आदेश


