संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक फिलहाल जारी रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। मंगलवार को सुनवाई उस कारण टल गई क्योंकि केस रजिस्टर्ड नंबर पर सूचीबद्ध नहीं हो सका।
यह मामला उस आदेश से जुड़ा है, जो संभल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने दिया था। इस आदेश में एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश को पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता यामीन की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर सीजेएम कोर्ट ने 9 जनवरी 2025 को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद एएसपी अनुज चौधरी ने 29 जनवरी 2025 को इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अलग से याचिका दायर की।
इस मामले में पहले भी 10 फरवरी 2025 को न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सीजेएम के आदेश पर रोक लगा दी थी, जो अब भी प्रभावी है। इससे पहले 9 फरवरी 2025 को भी करीब दो घंटे तक सुनवाई हुई थी।
पूरा मामला 6 फरवरी 2024 को दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें संभल निवासी यामीन ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे आलम को 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पुलिस ने गोली मारी थी। इसी आधार पर उन्होंने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था।
इसी बीच 24 नवंबर 2024 को संभल में उस समय हिंसा भड़क गई थी, जब मस्जिद के सर्वे को लेकर भारी भीड़ जमा हो गई और पथराव-फायरिंग की घटनाएं हुईं। इस हिंसा में 5 लोगों की मौत हुई थी और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
इस मामले में अब तक 12 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमे हुए हैं। कई आरोपियों की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद कुछ को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी मिल चुकी है।


