लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मंगलवार को ट्रैफिक जाम की गिरफ्त में पूरी तरह जकड़ी नजर आई। शहर के वीआईपी इलाकों से लेकर आम सड़कों तक हालात बेकाबू हो गए, जब बीजेपी के प्रदर्शन के चलते पुलिस ने कई मुख्य मार्गों को चारों ओर से बंद कर दिया।
हजरतगंज, गोमतीनगर, हनुमान सेतु और लखनऊ मध्य के अधिकांश हिस्सों में घंटों लंबा जाम लग गया। हालात इतने बिगड़े कि सचिवालय जाने वाले अधिकारी और कर्मचारी तक दो-दो घंटे तक सड़कों पर फंसे रहे।
पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग कर कई प्रमुख रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जिससे हजरतगंज की ओर आने वाला लगभग हर मार्ग प्रभावित हुआ। हजारों की संख्या में लोग भीषण गर्मी और तेज धूप में जाम में फंसकर बेहाल दिखे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर के कई हिस्सों में एंबुलेंस तक जाम में फंसी रहीं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा। आम नागरिकों ने आरोप लगाया कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त रही, जबकि आम जनता को राहत देने के लिए कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं आया।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन ट्रैफिक मैनेजमेंट पूरी तरह फेल साबित हुआ।
राजधानी में इस तरह का ट्रैफिक संकट प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। सवाल साफ है—क्या हर प्रदर्शन के नाम पर पूरे शहर को “बंधक” बना देना अब नई व्यवस्था बन चुकी है?
सोशल मीडिया पर लोग प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की जमकर आलोचना कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे “वीआईपी कल्चर बनाम आम जनता” की लड़ाई बताया है।
लखनऊ आज सिर्फ जाम में नहीं फंसा, बल्कि व्यवस्था की नाकामी भी सड़कों पर साफ दिखाई दी।
बीजेपी प्रदर्शन के चलते राजधानी ठप, हजरतगंज-गोमतीनगर में घंटों फंसे हजारों लोग


