वाशिंगटन
अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष एक बार फिर वैश्विक चिंता का कारण बन गया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम लागू है, जो 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इसी बीच ईरान के फोरेंसिक मेडिसिन संगठन ने दावा किया है कि इस युद्ध में अब तक कम से कम 3,375 लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे हालात की गंभीरता और बढ़ गई है।
युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि देश के हवाई अड्डों का लगभग 95 प्रतिशत ढांचा अभी भी सुरक्षित और कार्यशील है, जबकि कुछ विमानों को ही गंभीर नुकसान पहुंचा है। यह संकेत देता है कि संघर्ष के बीच भी ईरान अपनी नागरिक और रणनीतिक संरचनाओं को आंशिक रूप से सक्रिय रखने में सफल रहा है।
इस बीच सुरक्षा और खुफिया मोर्चे पर भी कार्रवाई तेज हो गई है। ईरान में जासूसी और तोड़फोड़ के आरोप में दो लोगों को फांसी दिए जाने की खबर सामने आई है, जिन पर कथित तौर पर विदेशी एजेंसियों के लिए काम करने और संवेदनशील स्थानों पर हमलों की साजिश रचने के आरोप थे। यह कदम देश के भीतर सुरक्षा नियंत्रण को और सख्त करने के संकेत देता है।
समुद्री और सैन्य मोर्चे पर भी तनाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी केंद्रीय कमान द्वारा जारी वीडियो में ओमान की खाड़ी में एक ईरानी ध्वज वाले जहाज पर अमेरिकी मरीन की कार्रवाई दिखाई गई है। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच समुद्री मार्गों और रणनीतिक क्षेत्रों को लेकर बढ़ते टकराव को उजागर करता है।
कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान के इस्लामाबाद में संभावित अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर तैयारियां तेज हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि मौजूदा तनावपूर्ण माहौल ने वार्ता की सफलता को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ा दी है।
इसी बीच क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में भी बदलाव देखे जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की सेना और विदेश नीति पर अब कट्टरपंथी संगठन IRGC का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे नरम रुख रखने वाले नेताओं की भूमिका सीमित होती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भविष्य की वार्ता और शांति प्रयासों को और जटिल बना सकता है, जबकि वैश्विक बाजार और कूटनीतिक संतुलन पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।


