लखनऊ। राजधानी के वजीरगंज क्षेत्र स्थित तहसील परिसर में अचानक लगी आग ने प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। आग गेट नंबर 3 के पास बने वकीलों के चैंबरों में भड़क उठी, जिससे अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते महत्वपूर्ण दस्तावेज व सामान जलकर राख हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग तेजी से फैली और कुछ ही मिनटों में कई चैंबर इसकी चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि कागजी फाइलें, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह जल गए, जिससे कई मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों के नष्ट होने की आशंका है। इससे न्यायिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
लेकिन इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या तहसील परिसर में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे?
क्या शॉर्ट सर्किट या लापरवाही आग की वजह बनी?
महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर क्या कोई बैकअप सिस्टम मौजूद था?
स्थानीय वकीलों का आरोप है कि तहसील परिसर में फायर सेफ्टी उपकरण या तो नदारद हैं या खराब हालत में पड़े हैं, और कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशासन की ओर से फिलहाल आग के कारणों की जांच की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि
हर बार हादसे के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम?
यदि समय रहते दमकल नहीं पहुंचती, तो यह आग और भी बड़ा रूप ले सकती थी, जिससे पूरा तहसील परिसर खतरे में आ सकता था।
तहसील में भीषण आग: वकीलों के चैंबर राख, फाइलें जलीं—प्रशासनिक लापरवाही या बड़ा खतरा टला?


