30% तक बढ़ोतरी पर उठे सवाल, डीएम कार्यालय पर धरना
लखनऊ। राजधानी में निजी स्कूलों द्वारा फीस में भारी बढ़ोतरी किए जाने के विरोध में अभिभावकों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। बुधवार को बड़ी संख्या में अभिभावक जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई निजी स्कूलों ने बिना किसी स्पष्ट कारण और नियमों का पालन किए 30 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
अभिभावकों का कहना है कि प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से फीस नियंत्रण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने के बावजूद निजी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन न तो अभिभावकों से कोई चर्चा करता है और न ही बढ़ी हुई फीस का कोई उचित औचित्य प्रस्तुत करता है। कई अभिभावकों ने यह भी कहा कि फीस न जमा करने पर बच्चों को कक्षा में बैठने से रोकने और परीक्षा में शामिल न करने की चेतावनी दी जा रही है, जो पूरी तरह से अनुचित है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए फीस वृद्धि पर तत्काल रोक लगाने, पिछले वर्षों की फीस संरचना को लागू करने और दोषी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी मांगों पर शीघ्र सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों ने अभिभावकों को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों की जांच कराई जाएगी और नियमों के विरुद्ध फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फीस वृद्धि के मामलों की समीक्षा की जा रही है और यदि कोई स्कूल निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजधानी में शिक्षा व्यवस्था और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब तक फीस वृद्धि पर नियंत्रण नहीं किया जाएगा, तब तक आम परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल होता जाएगा।


