फर्रुखाबाद। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर लोकतंत्र सेनानी संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए लोगों से शिक्षित बनने और अपने बच्चों को शिक्षित करने का आह्वान किया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा का स्वरूप लगातार बदल रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह भी देखने को मिल रहा है कि शिक्षा धीरे-धीरे महंगी होती जा रही है, जिससे आम जनमानस के लिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि शिक्षा को सुलभ और सस्ता बनाया जाए, ताकि समाज के हर वर्ग के बच्चे समान अवसर प्राप्त कर सकें।
वक्ताओं ने निजी विद्यालयों की बढ़ती फीस और मनमानी पर चिंता जताते हुए कहा कि कई प्राइवेट स्कूल शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। इस पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता बनी रहे।
संगठन के अध्यक्ष चंद्रपाल वर्मा ने अपने संबोधन में बाबा साहब के विचारों को याद करते हुए कहा कि “शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जिसे जो पिएगा, वही दहाड़ेगा।” उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल रोजगार का साधन नहीं बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम समझा जाना चाहिए। शिक्षा को व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन के रूप में अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा कि जब तक समाज का हर व्यक्ति शिक्षित नहीं होगा, तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है। इसलिए सभी अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें, जिससे आने वाले समय में भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ सके।
इस अवसर पर गोपीनाथ मिश्रा, शिवराम सिंह, पंकज कुमार, विनोद वर्मा, रमेश चंद्र और देवेंद्र कुमार सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और बाबा साहब के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
अंबेडकर जयंती पर शिक्षा को मिशन बनाने का आह्वान


