मैनपुरी
जनपद में प्रस्तावित फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अछल्दा क्षेत्र के पास स्थित मुड़ई गांव में बड़ी संख्या में किसान प्रशासन द्वारा तय मुआवजे से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं, जिसके चलते परियोजना के कार्य में बाधा उत्पन्न हो गई है। किसानों और प्रशासन के बीच चल रही वार्ता फिलहाल बेनतीजा साबित हुई है।
जानकारी के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत मुड़ई गांव के करीब 1500 से अधिक किसानों की लगभग 27 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) द्वारा किसानों को 30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा गया है, जो गांव के सर्किल रेट के आधार पर निर्धारित किया गया है। हालांकि किसान इस मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए 40 से 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की मांग कर रहे हैं।
सोमवार को अपर जिलाधिकारी श्याम लता आनंद अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ गांव पहुंचीं और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वार्ता सफल नहीं हो सकी। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन उपजाऊ है और वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से प्रस्तावित मुआवजा बहुत कम है। ऐसे में वे अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक वे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में सहयोग नहीं करेंगे। इस मुद्दे को लेकर गांव में लगातार बैठकें और विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इससे स्थानीय लोगों को भविष्य में बेहतर सड़क सुविधा, रोजगार और आर्थिक अवसर मिलेंगे। अधिकारियों ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा और जल्द ही फिर से वार्ता कर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।
फिलहाल इस विवाद के चलते एक्सप्रेसवे परियोजना की प्रगति प्रभावित हो रही है। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला तो यह परियोजना और अधिक विलंब का शिकार हो सकती है। वहीं किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और प्रशासन उन्हें मनाने के प्रयास में जुटा हुआ है।


