फर्रुखाबाद। सिख लाइट रेजीमेंट सेंटर स्थित गुरुद्वारे में बैसाखी पर्व एवं खालसा पंथ स्थापना दिवस का शुभारंभ पूरे धार्मिक उल्लास, अनुशासन और सैन्य गरिमा के साथ किया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारे को रंग-बिरंगी झालरों और आकर्षक फूलों से सजाकर भव्य रूप दिया गया, जिससे पूरे परिसर में उत्सव का माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत निशान साहिब की सेवा एवं उसके वस्त्र परिवर्तन के साथ हुई। इस पावन अवसर पर सलामी गारद द्वारा 40 राउंड फायर कर सम्मान अर्पित किया गया। मिलिट्री बैंड की मधुर और जोशीली धुनों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय और देशभक्ति से ओत-प्रोत हो उठा।
गुरुद्वारे में सभी धार्मिक अनुष्ठान ज्ञानी सर्वजीत सिंह के निर्देशन में विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न कराए गए। श्रद्धालुओं ने सेवा में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके पश्चात सेंटर एवं देश की उन्नति, शांति और समृद्धि के लिए विशेष अरदास की गई।
आयोजन में बताया गया कि बैसाखी का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत विशेष है। 15 अप्रैल 1699 को आनंदपुर साहिब में सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी दिन से सिख धर्म में पांच ककार—कच्छा, कड़ा, कंघा, केश और कृपाण—धारण करने की परंपरा शुरू हुई। साथ ही पुरुषों के नाम के साथ ‘सिंह’ और महिलाओं के नाम के साथ ‘कौर’ लगाने की परंपरा भी प्रारंभ हुई, जिसका पालन आज भी पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ किया जा रहा है।
मंगलवार को मुख्य बैसाखी पर्व को और अधिक धूमधाम से मनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
इस अवसर पर ब्रिगेडियर कमांडेंट मनीष कुमार जैन, कैप्टन जसवीर सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल आदर्श भारती, सीआरओ मदन चौधरी, मेजर गुरदेव सिंह, रणजीत सिंह, बलवीर सिंह सहित अनेक सैन्य अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सैन्य अनुशासन और एकता का भी शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया।
सिख लाइट गुरुद्वारे में धूमधाम से शुरू हुआ बैसाखी पर्व, खालसा पंथ स्थापना दिवस की गूंज


