लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर किसानों को केंद्र में रखते हुए बड़ा सियासी दांव चला है। शनिवार को दिए गए अपने संबोधन में उन्होंने किसानों के लिए कई अहम वादों का ऐलान किया, जिसमें गन्ना किसानों को 24 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने, दूध सहित 23 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने और गांवों को ‘स्मार्ट गांव’ के रूप में विकसित करने की योजना प्रमुख रही।
अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर 15 हजार करोड़ रुपये का “किसान रिवॉल्विंग फंड” बनाया जाएगा, जिससे गन्ना किसानों की पर्ची कटते ही सीधे उनके बैंक खाते में भुगतान पहुंच जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि किसानों को कर्ज के बोझ से राहत देने के लिए “एग्रीकल्चर डेब्ट रिलीफ एक्ट” लाया जाएगा, जिससे कर्ज माफी का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
सपा प्रमुख ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दूध को भी एमएसपी के दायरे में शामिल करने की बात कही, जो अब तक राष्ट्रीय स्तर पर लागू नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने गांवों में बेहतर सड़क, बिजली, इंटरनेट और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘स्मार्ट गांव’ योजना लागू करने का वादा किया।
राजनीतिक बयानबाजी के दौरान अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार स्मार्ट मीटर के जरिए जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है और कृषि उत्पादों के आयात से देश के किसानों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय रूप से पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों को साधने की यह रणनीति सपा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि, इन वादों के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन को लेकर विपक्ष सवाल उठा सकता है, जिससे आने वाले समय में सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।


