नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद अब आधिकारिक तौर पर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया का हिस्सा बन गए हैं। पार्टी ने इनके विलय की औपचारिक घोषणा कर दी है। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इन सांसदों के लिए संसद में अलग बैठने की व्यवस्था किए जाने के बाद एनसीपीआई ने दावा किया कि अब उसके संसदीय दल को औपचारिक मान्यता मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
रविवार को संसद भवन में एनसीपीआई संसदीय दल की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता सुदीप बंद्योपाध्याय ने की। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने सभी 20 सांसदों को अलग सीटें आवंटित कर दी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई, जिसमें आगामी संसदीय सहयोग और समन्वय पर चर्चा हुई।
एनसीपीआई की मुख्य सचेतक काकोली घोष ने कहा कि उनकी पार्टी अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ है और मानसून सत्र के दौरान सरकार द्वारा लाए जाने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों का समर्थन करेगी। उन्होंने बताया कि मंगलवार को होने वाली एनडीए की बैठक में भी एनसीपीआई शामिल होगी।
पार्टी द्वारा जारी सूची में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, माला रॉय, प्रसून बनर्जी, यूसुफ पठान, जून मालिया, रचना बनर्जी सहित कुल 20 सांसदों के नाम शामिल हैं। एनसीपीआई ने कहा कि इन नेताओं के जुड़ने से संगठन की जनसेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।
पश्चिम बंगाल के 20 सांसदों का यह विलय राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। मानसून सत्र में सरकार के कई अहम विधेयकों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर इस नए समीकरण का असर देखने को मिल सकता है।


