नई दिल्ली। कैंसर की दवाओं की ऊंची कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से सवाल किए। अदालत ने पूछा कि 2,700 रुपये की दवा पर 27,000 रुपये की अधिकतम खुदरा कीमत कैसे तय की गई। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ दवाओं की कीमत और जेनेरिक दवाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
अदालत ने निजी अस्पतालों में दवाओं की बिक्री व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि मरीजों को कई बार अस्पताल की अपनी दवा दुकान से ही दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। अदालत ने पूछा कि सरकारी योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों की महंगी दवाओं का खर्च आखिर कौन उठाता है।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जिन दवाओं की कीमत सरकार नियंत्रित करती है, उनका बाजार में हिस्सा सीमित है, जबकि अन्य दवाओं की कीमतों पर सीधा नियंत्रण कम है।
सरकार के औषधि विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत में कैंसर-रोधी दवाओं की बिक्री करीब 5,281 करोड़ रुपये रही। वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 3,382 करोड़ रुपये था।
दवा की कीमतों को लेकर इससे पहले 22 सितंबर को हुई सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने 2,700 रुपये की दवा पर 27,000 रुपये की कीमत को लेकर सवाल उठाए थे। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।


