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Monday, June 15, 2026

एमबीए छोड़ खेती में लिखा सफलता का नया अध्याय, फर्रुखाबाद के युवा सचिन शाक्य ने मैदानी क्षेत्र में उगा दिए सेब

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प्रशांत कटियार
फर्रुखाबाद। जहां अधिकांश युवा उच्च शिक्षा के बाद नौकरी की तलाश में महानगरों का रुख करते हैं, वहीं कायमगंज क्षेत्र के सिकंदरपुर छितमा गांव के युवा किसान सचिन शाक्य ने परंपरागत सोच से हटकर खेती में ऐसा प्रयोग किया है, जिसने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद सचिन ने नौकरी की बजाय कृषि क्षेत्र में कुछ नया करने का फैसला किया और आज उनकी मेहनत सफलता की मिसाल बन चुकी है।
उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाके में सेब की खेती को आमतौर पर कठिन माना जाता है, लेकिन सचिन शाक्य ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश से उन्नत किस्म के सेब के पौधे मंगवाए और वैज्ञानिक पद्धति से बाग तैयार किया। पौधों की बेहतर देखभाल के लिए आधुनिक ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगाया गया, जिससे पौधों को आवश्यकता के अनुसार पानी और पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा सके।
करीब तीन वर्षों की लगातार मेहनत, तकनीकी जानकारी और धैर्य का परिणाम अब सामने है। सचिन के बाग में सैकड़ों पेड़ों पर सेब की भरपूर पैदावार हो रही है। इन फलों की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बरेली की मंडियों में भी बढ़ रही है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि वैज्ञानिक तरीके और नई तकनीकों का उपयोग किया जाए तो मैदानी क्षेत्रों में भी सेब की खेती संभव है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय सचिन ने सेब की खेती शुरू की थी, तब कई लोगों ने उनके निर्णय को जोखिम भरा बताया था। लेकिन आज वही लोग उनके बाग का निरीक्षण करने पहुंच रहे हैं। क्षेत्र के किसान, कृषि विद्यार्थी और युवा उद्यमी सचिन की खेती को नजदीक से देखने और उससे सीखने के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं।

सचिन शाक्य का मानना है कि खेती को घाटे का सौदा समझने की धारणा बदलने की जरूरत है। नई तकनीक, वैज्ञानिक सोच और बाजार की मांग के अनुसार फसल चयन करके किसान बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक उद्यमिता का भी मजबूत माध्यम बन सकती है।
कायमगंज के सिकंदरपुर छितमा गांव से निकली यह सफलता की कहानी आज जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। सचिन शाक्य ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो खेत भी सफलता की नई इबारत लिख सकते हैं और गांव से ही आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।

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