लखनऊ। खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कमी न हो, इसके लिए योगी सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर निगरानी बढ़ा दी है। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक समय से खाद उपलब्ध कराई जाए और किसी भी स्तर पर कालाबाजारी या निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 12 अगस्त तक प्रदेश में 5.02 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध थी। वहीं फास्फेटिक उर्वरकों का भंडार 4.04 लाख एलएमटी बताया गया है। खरीफ-2026 के दौरान अब तक किसानों को 10.83 लाख एलएमटी उर्वरक वितरित किया जा चुका है।
खाद वितरण को लेकर सरकार ने उन सहकारी समितियों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, जहां उर्वरकों का स्टॉक निर्धारित जरूरत के मुकाबले कम है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसी समितियों की नियमित समीक्षा की जाए और जरूरत के अनुसार तत्काल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को खाद के लिए एक केंद्र से दूसरे केंद्र के चक्कर न लगाने पड़ें।
खरीफ की फसलों के लिए यूरिया और फास्फेटिक उर्वरकों की मांग बढ़ने के कारण वितरण व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि बुआई और फसल की आवश्यकता के समय किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे क्षेत्रों में यदि किसी सहकारी समिति तक पहुंचना मुश्किल हो तो किसानों को नजदीकी वैकल्पिक समिति के माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि प्राकृतिक आपदा के कारण खाद की आपूर्ति बाधित न हो और प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को भी समय पर आवश्यक उर्वरक मिल सके।
सरकार ने उर्वरक विक्रेताओं को निर्धारित दर पर ही खाद बेचने के निर्देश दिए हैं। किसानों से अधिक कीमत वसूलने, कालाबाजारी करने अथवा कृत्रिम रूप से खाद की कमी पैदा करने की कोशिश को गंभीरता से लेने को कहा गया है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि खाद की बिक्री और स्टॉक का नियमित निरीक्षण किया जाए। यदि कहीं ओवररेटिंग या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।


