लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना योगी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार विभागों के बंटवारे के साथ पूरा हो गया। 10 मई को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद रविवार को नए मंत्रियों के विभागों का ऐलान किया गया। विभागों के आवंटन के साथ ही सत्ता गलियारों में चल रहे तमाम कयासों पर विराम लग गया। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की थी कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बड़े और प्रभावशाली मंत्रालयों में फेरबदल करेंगे, लेकिन विभागों के बंटवारे ने साफ संकेत दिया कि योगी ने संतुलन और राजनीतिक संदेश दोनों को साधने की कोशिश की है।
सबसे अधिक निगाहें बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी पर थीं। चर्चा थी कि उन्हें लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी जैसा भारी-भरकम मंत्रालय दिया जा सकता है, लेकिन योगी सरकार ने उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई विभाग की जिम्मेदारी सौंपी। पहली नजर में यह विभाग पीडब्ल्यूडी जितना ताकतवर नहीं माना जाता, लेकिन राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से इसे बेहद अहम माना जा रहा है।
एमएसएमई विभाग के जरिए प्रदेश में रोजगार, उद्योग और स्वरोजगार से जुड़ी कई बड़ी योजनाएं संचालित होती हैं। मुख्यमंत्री रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना और यूपी स्मॉल इंडस्ट्री कॉरपोरेशन जैसी योजनाओं पर सीधे केंद्र और मुख्यमंत्री कार्यालय की नजर रहती है। ऐसे में यह स्पष्ट माना जा रहा है कि भूपेंद्र चौधरी को संगठन और सरकार के बीच महत्वपूर्ण भूमिका में रखा गया है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी के साथ आए मनोज पाण्डेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति जैसा बड़ा विभाग देकर योगी सरकार ने स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। यह विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है और राशन वितरण व्यवस्था के कारण राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली माना जाता है। माना जा रहा है कि सपा से आए नेताओं को महत्व देकर बीजेपी विपक्षी दलों में सेंध की अपनी रणनीति को और मजबूत करना चाहती है।
मंत्रिमंडल विस्तार में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनाए गए अजीत सिंह पाल को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सौंपा गया है, जबकि सोमेंद्र तोमर को सैनिक कल्याण, राजनीतिक पेंशन और प्रांतीय रक्षक दल की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास, कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत तथा सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग में जिम्मेदारी दी गई है। हंसराज विश्वकर्मा को एमएसएमई विभाग से जोड़ा गया है।
विभागों के इस बंटवारे से यह भी साफ हो गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुराने मंत्रियों के प्रभाव को पूरी तरह कम किए बिना नए चेहरों को समायोजित करने का रास्ता निकाला है। हालांकि कुछ मंत्रियों के विभागों में कटौती भी हुई है। एमएसएमई विभाग पहले राकेश सचान के पास था, जिन्हें अब सीमित दायरे में काम करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी सरकार ने आगामी चुनावी समीकरणों और जातीय संतुलन को ध्यान में रखकर यह पूरी रणनीति तैयार की है।
राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा तेज है कि विभागों के इस बंटवारे के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि अंतिम निर्णय और सत्ता का केंद्र अभी भी पूरी तरह उनके हाथ में है।


