– 42 हजार करोड़ का गंगा एक्सप्रेसवे मॉडल पेश
लखनऊ। सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा विभाग के नव चयनित लेखा परीक्षकों को नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक बदलाव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले यूपी की छवि ऐसी थी कि कोई बैंक कर्ज देने को तैयार नहीं था, लेकिन अब राज्य ‘रेवेन्यू सरप्लस’ बन चुका है।
सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि 2017 में सरकार बनने के समय खजाना खाली था और वित्तीय अव्यवस्था चरम पर थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले बिना बजट के खर्च और ‘रेवड़ी संस्कृति’ ने प्रदेश को बीमारू बना दिया था। “कोई बैंक चेयरमैन या सीएम डी फोन तक उठाने को तैयार नहीं था,” यह कहते हुए उन्होंने उस दौर की गंभीरता को रेखांकित किया।
सरकार की रणनीति बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना कर्ज लिए वित्तीय अनुशासन लागू किया गया, जिसके चलते आज बड़े प्रोजेक्ट्स भी अपने संसाधनों से पूरे किए जा रहे हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे का जिक्र किया, जिसकी लंबाई करीब 600 किलोमीटर है और जिस पर 36,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है।
सीएम के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के साथ 9 इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक हब भी विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए करीब 7000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है। कुल मिलाकर इस परियोजना में 42,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश बताया गया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा, कानून व्यवस्था और वित्तीय अनुशासन किसी भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, और यूपी ने इन तीनों मोर्चों पर बदलाव करके दिखाया है।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस दावे पर बहस भी तेज है क्या वास्तव में प्रदेश पूरी तरह रेवेन्यू सरप्लस मॉडल पर टिक गया है, या यह आंकड़ों की प्रस्तुति का सवाल है?
फिलहाल, नियुक्ति-पत्र पाकर युवा लेखा परीक्षकों में उत्साह है, लेकिन असली परीक्षा अब सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की होगी जिसका दावा मंच से जोरदार तरीके से किया गया।
लखनऊ में नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम: सीएम योगी आदित्यनाथ का दावा ‘बीमारू’ से ‘रेवेन्यू सरप्लस’ बना यूपी


