– विरासत के सहारे नई राजनीतिक बिसात!
लखनऊ। राजधानी में आज सियासी और प्रतीकात्मक संदेशों से भरा एक अहम कार्यक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की जयंती पर योजना भवन स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे और उन्होंने भी श्रद्धांजलि देकर बहुगुणा की राजनीतिक विरासत को याद किया।
कार्यक्रम महज श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए सत्ता पक्ष ने एक बार फिर इतिहास और विरासत के जरिए अपने राजनीतिक संदेश को मजबूती देने की कोशिश की। बहुगुणा को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें “भारत की राजनीति का मजबूत स्तंभ” बताया और उनके योगदान को प्रेरणास्रोत बताया।
इतिहास गवाह है कि हेमवती नंदन बहुगुणा न केवल उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता रहे, बल्कि उन्होंने आजादी की लड़ाई में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी भागीदारी उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी स्थापित करती है। यही वजह है कि उनकी जयंती आज भी राजनीतिक दलों के लिए एक अहम अवसर बन जाती है।
सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के आयोजनों के जरिए भाजपा सरकार प्रदेश में अपने वैचारिक और ऐतिहासिक कनेक्शन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ऐसे कार्यक्रमों की राजनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बहुगुणा जैसे नेताओं की विरासत को साधना, प्रदेश की सियासत में पुराने वोट बैंक और नए समीकरणों को जोड़ने की कोशिश का हिस्सा है। अब देखना यह होगा कि श्रद्धांजलि के ये मंच आने वाले चुनावी समीकरणों में कितना असर डालते हैं, या फिर यह सिर्फ प्रतीकात्मक राजनीति तक ही सीमित रह जाता है।
बहुगुणा जयंती पर सीएम योगी का शक्ति प्रदर्शन


