वॉशिंगटन/तेहरान/तेल अवीव। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति के सैन्य अधिकारों को सीमित करने वाला महत्वपूर्ण प्रस्ताव एक वोट से गिर गया। प्रस्ताव के पक्ष में 49 और विरोध में 50 वोट पड़े, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के सीनेटर डेव मैककॉर्मिक ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता तो राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले कांग्रेस की मंजूरी लेना अनिवार्य होता।
उधर युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिका ने ईरान के कई शहरों और रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है। ईरानी मीडिया ने इसका वीडियो भी जारी किया है। साथ ही कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का भी दावा किया गया है।
इजराइल ने भी दक्षिणी लेबनान में रातभर हवाई और तोपों से हमले किए। वहीं मिस्र के एक बंदरगाह पर ड्रोन हमले में दो जहाजों में आग लगने की घटना सामने आई है। इस बीच सऊदी अरब ने लाल सागर (रेड सी) में जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिसमें अब तक 14 देशों ने रुचि दिखाई है।
युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिख रहा है। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन जुलाई महीने में कुल मिलाकर करीब 20 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान है। दूसरी ओर ईरान ने चेतावनी दी है कि हालिया हमलों से गैस संयंत्रों को नुकसान पहुंचने के कारण इस सर्दी प्रतिदिन करीब 10 करोड़ घन मीटर प्राकृतिक गैस की कमी हो सकती है। साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने और अमेरिकी हमलों का जवाब देने की भी चेतावनी दोहराई है।


