लखनऊ। भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए जा चुके जंगी ऐप के आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों में इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस ) ने जांच तेज कर दी है। बहराइच से गिरफ्तार किए गए संदिग्धों के मोबाइल फोन की जांच में मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रतिबंधित संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े सक्रिय सदस्यों द्वारा जंगी ऐप का इस्तेमाल सुरक्षित संवाद और नेटवर्क विस्तार के लिए किया जा रहा था। इस मामले में मनवीर सिंह ढिल्लों और विक्रमजीत सिंह समेत कई अन्य संदिग्धों की गतिविधियां जांच के दायरे में हैं। एटीएस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क का विस्तार किन राज्यों तक है और इसके विदेशी संपर्क कितने मजबूत हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भी इसी प्रतिबंधित ऐप का उपयोग करता था। सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि कहीं आतंकी संगठनों, अलगाववादी तत्वों और संगठित अपराध से जुड़े गिरोहों के बीच किसी प्रकार का समन्वय तो नहीं था।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर जंगी ऐप पर पहले ही प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद प्रतिबंधित संगठनों द्वारा इसके कथित इस्तेमाल का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं।यदि चाहें तो इसे दैनिक यूथ इंडिया की लीड स्टोरी शैली में और अधिक प्रभावशाली शीर्षक व उपशीर्षक के साथ भी तैयार किया जा सकता है।


