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Thursday, July 30, 2026

दवा का काला कारोबार धड़ल्ले से ‘कटिंग’, जीएसटी चोरी और बिना बिल दवा आपूर्ति

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फर्रुखाबाद। जिले मे खुलेआम अमानक और आगरा मेड दवाओं की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है, जिम्मेदार आँखें मुंदे हैं जिससे आम जनमानस का खुलेआम शोषण होने लगा है,कुछ थोक दवा विक्रेता कथित तौर पर बिना वैध बिल के दवाओं की आपूर्ति, बिलों में ‘कटिंग’ और जीएसटी नियमों के उल्लंघन जैसे कार्यों में संलिप्त हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो सकता है, बल्कि दवा आपूर्ति प्रणाली की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।

स्थानीय व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, आगरा से आने वाली दवाओं की खेप जनपद के कुछ थोक विक्रेताओं के माध्यम से विभिन्न मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाई जाती है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ स्थानों पर बिलों में हेरफेर, ‘कटिंग’ तथा जीएसटी से जुड़े नियमों की अनदेखी की जाती है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आरोपों के दायरे में जिन प्रतिष्ठानों के नाम स्थानीय स्तर पर चर्चा में बताए जा रहे हैं, उनमें एस.आर. एजेंसी, एस फार्मा, बाबा फार्मा, तक्षक फार्मा (तिवारी गली) तथा एच एल फार्मा (नेहरू रोड) सहित कुछ अन्य प्रतिष्ठानों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन सभी प्रतिष्ठानों पर लगे आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं और संबंधित पक्षों का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
व्यापारिक जानकारों का कहना है कि यदि दवा कारोबार में बिना बिल बिक्री, फर्जी बिलिंग या जीएसटी चोरी जैसी अनियमितताएं हो रही हैं तो इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ वैध कारोबार करने वाले व्यापारियों को भी प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान उठाना पड़ता है। दवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में रिकॉर्ड की पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि संबंधित विभाग के नए अधिकारी ने हाल ही में कार्यभार संभाला है और अभी उन्हें जनपद की वास्तविक स्थिति से पूरी तरह अवगत होने का अवसर नहीं मिला है। ऐसे में व्यापारिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने राज्य जीएसटी विभाग, औषधि प्रशासन और आयकर विभाग से पूरे मामले की संयुक्त जांच कराने की मांग की है।
यदि जांच में किसी भी स्तर पर कर चोरी, फर्जी बिलिंग या अन्य वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो संबंधित प्रतिष्ठानों का पक्ष भी समान रूप से महत्वपूर्ण होगा।

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