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Sunday, July 19, 2026

हाईकोर्ट सख्त: दागी व फर्जी डिग्रीधारी वकीलों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में वकालत के पेशे में कथित अपराधी प्रवृत्ति के लोगों और फर्जी डिग्रीधारी अधिवक्ताओं की बढ़ती घुसपैठ पर गहरी चिंता जताते हुए इसे न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा बताया है। न्यायालय ने कहा कि यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई तो आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कमजोर होगा।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य में अधिवक्ताओं के आपराधिक रिकॉर्ड, फर्जी डिग्रियों और बार काउंसिल की अनुशासनात्मक व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रदेश के डीजीपी, डीजीपी (अभियोजन), उत्तर प्रदेश बार काउंसिल तथा रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में 5.14 लाख से अधिक सक्रिय अधिवक्ता पंजीकृत हैं। इनमें 4,157 अधिवक्ताओं के खिलाफ 5,056 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। 418 अधिवक्ताओं पर तीन या उससे अधिक मुकदमे लंबित हैं, जबकि कुछ अधिवक्ताओं के खिलाफ 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने के बावजूद वे लगातार वकालत कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किल के प्रतिनिधि नहीं बल्कि न्याय वितरण प्रणाली के महत्वपूर्ण अंग हैं। इसलिए उनके आचरण और पेशे की शुचिता बनाए रखना बार काउंसिल और न्यायपालिका दोनों की जिम्मेदारी है। अदालत ने टिप्पणी की कि विधि व्यवसाय में गैंगस्टर, माफिया, आदतन अपराधियों और फर्जी शैक्षणिक योग्यता रखने वाले लोगों की घुसपैठ संस्थागत और नैतिक संकट का संकेत है।

न्यायालय ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को फर्जी डिग्री वाले 105 अधिवक्ताओं के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और प्रतिरूपण सहित संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। साथ ही जिन अधिवक्ताओं के खिलाफ जघन्य अपराधों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, उनके विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई कर आवश्यक होने पर उनका अधिवक्ता लाइसेंस निलंबित करने को कहा है।

इसके अलावा हाईकोर्ट ने जिला न्यायाधीशों, पुलिस अधिकारियों और बार काउंसिल के बीच नियमित सूचना आदान-प्रदान की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ऐसे मामलों में समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल को अपने वैधानिक दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करना होगा, तभी न्याय व्यवस्था की गरिमा और जनता का विश्वास कायम रह सकेगा।

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