कमालगंज संवाददाता।
फर्रुखाबाद के ब्लॉक कमालगंज रामलीला मैदान में चल रही रामलीला के दूसरे दिन बुधवार रात जानकी जन्मोत्सव की लीला का सजीव मंचन किया गया। माता सीता के प्राकट्य प्रसंग ने दर्शकों को भक्ति और भावुकता से भर दिया। पूरा मैदान “सियावर रामचंद्र की जय” के जयकारों से गूंज उठा।
रामलीला मंचन में दिखाया गया कि मिथिला राज्य में लंबे समय तक भीषण अकाल पड़ा था। प्रजा के कष्ट और राज्य की दुर्दशा से चिंतित राजा जनक ने राजगुरु और ऋषि-मुनियों से परामर्श लिया। ऋषियों की सलाह पर लोक-कल्याण के लिए राजा जनक स्वयं राजमहल से निकलकर खेत में हल चलाने पहुंचे।
इसी अलौकिक प्रसंग को कलाकारों ने अत्यंत मार्मिकता से प्रस्तुत किया। हल चलाते समय अचानक हल का फल एक कलश से टकराया। जब राजा जनक ने सेवकों से कलश को निकलवाया तो उसमें से दिव्य प्रकाश के साथ एक नवजात कन्या प्रकट हुई। तेज से दमकती उस कन्या को देख राजा जनक ने भाव-विह्वल होकर उसे ईश्वर का प्रसाद मानकर अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार कर लिया।
प्रसंग की व्याख्या करते हुए रामलीला के व्यास पं. लक्ष्मीकांत जी ने बताया कि हल के अग्रभाग को ‘सीत’ कहा जाता है। खेत में हल चलाने के दौरान ‘सीत’ से कन्या के प्रकट होने के कारण ही राजा जनक ने उसका नाम सीता रखा, जो आगे चलकर माता जानकी के नाम से जगत पूज्या बनीं।
देर रात तक चले इस मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में धनुष यज्ञ और राम-सीता विवाह की लीलाओं का मंचन किया जाएगा।


