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Sunday, October 11, 2026

मधुमेह के घाव क्यों नहीं भरते? विज्ञान की नई खोज

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*डॉ. विजय गर्ग*

मधुमेह एक दीर्घकालिक बीमारी है, जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। इसके उपचार में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है, लेकिन इसकी एक गंभीर जटिलता अक्सर अनदेखी रह जाती है—घावों का देर से भरना। सामान्य व्यक्ति के शरीर पर लगा छोटा-सा कट, छाला या चोट कुछ दिनों में ठीक हो सकता है, जबकि मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति में वही घाव कई सप्ताह या महीनों तक बना रह सकता है। गंभीर मामलों में संक्रमण, ऊतकों को नुकसान और यहाँ तक कि अंग काटने की नौबत भी आ सकती है।

*आखिर मधुमेह के घाव इतनी देर से क्यों भरते हैं?* वैज्ञानिक इस समस्या के पीछे काम करने वाली जैविक प्रक्रियाओं का अध्ययन कर रहे हैं। उनके शोध से यह समझने में मदद मिल रही है कि मधुमेह शरीर की प्राकृतिक मरम्मत प्रणाली को किस प्रकार प्रभावित करता है। यह ज्ञान भविष्य में बेहतर उपचार और घावों की देखभाल के नए रास्ते खोल सकता है।

## शरीर सामान्य रूप से घाव कैसे भरता है?

घाव भरना एक सुव्यवस्थित जैविक प्रक्रिया है, जिसमें रक्त वाहिकाएँ, प्रतिरक्षा कोशिकाएँ, त्वचा की कोशिकाएँ और संयोजी ऊतक मिलकर काम करते हैं। त्वचा पर चोट लगने पर सबसे पहले रक्त का थक्का बनता है, जिससे रक्तस्राव रुकता है। इसके बाद सूजन की प्रक्रिया हानिकारक सूक्ष्मजीवों और क्षतिग्रस्त ऊतकों को हटाने में मदद करती है।

अगले चरण में नई रक्त वाहिकाएँ बनती हैं, त्वचा की कोशिकाएँ बढ़ती हैं और कोलेजन नामक प्रोटीन क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बनाने में सहायक होता है। अंततः घाव धीरे-धीरे बंद हो जाता है और नया ऊतक मजबूत होने लगता है।

मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति में इस प्रक्रिया के कई चरण बाधित हो सकते हैं। परिणामस्वरूप, घाव भरने की गति धीमी पड़ जाती है।

## उच्च रक्त शर्करा की भूमिका

लंबे समय तक रक्त में शर्करा का स्तर अधिक रहना घावों के देर से भरने का एक प्रमुख कारण है। इससे रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुँच सकता है, प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और शरीर में सूजन लंबे समय तक बनी रह सकती है।

छोटी रक्त वाहिकाएँ घायल ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्त्व पहुँचाने में कमजोर पड़ सकती हैं। इनके अभाव में कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हिस्से की प्रभावी ढंग से मरम्मत नहीं कर पातीं।

उच्च रक्त शर्करा के कारण शरीर में *एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स * नामक यौगिक भी जमा हो सकते हैं। ये शर्करा और प्रोटीन या वसा के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनते हैं। इनका जमाव ऊतकों को नुकसान पहुँचा सकता है, ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ा सकता है और कोशिकाओं के बीच सामान्य संचार को बाधित कर सकता है।

इस प्रकार शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है।

## खराब रक्त संचार और नसों को नुकसान

मधुमेह की दो सामान्य जटिलताएँ—खराब रक्त संचार और परिधीय न्यूरोपैथी यानी नसों की क्षति—घाव भरने में बड़ी बाधा बनती हैं।

जब रक्त संचार कमजोर होता है, तो प्रभावित हिस्से तक ऑक्सीजन, पोषक तत्त्व और संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाएँ पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँच पातीं। इससे संक्रमण से मुकाबला करने और नए ऊतक बनाने की क्षमता कम हो जाती है।

नसों को नुकसान पहुँचने से एक और खतरा पैदा होता है। व्यक्ति को पैरों में छाले, कटने, जलने या दबाव से लगी चोट का दर्द महसूस नहीं हो सकता। परिणामस्वरूप, चोट का पता देर से चलता है और चलते रहने या लगातार दबाव पड़ने से घाव अधिक गंभीर हो सकता है।

छोटी चोट धीरे-धीरे गहरे अल्सर में बदल सकती है। यदि संक्रमण हो जाए और समय पर उपचार न मिले, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

## प्रतिरक्षा प्रणाली ठीक से काम क्यों नहीं करती?

घाव भरने के लिए सूजन आवश्यक है, लेकिन उसका नियंत्रित रहना भी उतना ही जरूरी है। सामान्य स्थिति में प्रतिरक्षा कोशिकाएँ बैक्टीरिया और क्षतिग्रस्त ऊतकों को हटाती हैं। इसके बाद शरीर पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू करता है।

मधुमेह से संबंधित घावों में यह बदलाव ठीक से नहीं हो पाता। सूजन पैदा करने वाले संकेत लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं, जबकि ऊतकों की मरम्मत करने वाली कोशिकाएँ अपेक्षित ढंग से काम नहीं कर पातीं।

उदाहरण के लिए, मैक्रोफेज नामक प्रतिरक्षा कोशिकाएँ हानिकारक पदार्थों को हटाने और ऊतकों के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। घाव भरने के अलग-अलग चरणों में उनकी गतिविधि का बदलना आवश्यक है। इस संतुलन में गड़बड़ी होने से सूजन लंबे समय तक बनी रह सकती है और घाव भरने की प्रक्रिया रुक सकती है।

वैज्ञानिक यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि इन प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को किस प्रकार सामान्य बनाया जा सकता है।

## वैज्ञानिक खोज और नई उपचार संभावनाएँ

वैज्ञानिक कई परस्पर जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं का अध्ययन कर रहे हैं, जो मधुमेह के घावों के लंबे समय तक खुले रहने का कारण बन सकती हैं। इनमें नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण में कमी, ऑक्सीडेटिव तनाव, लगातार बनी रहने वाली सूजन, कोशिकाओं की ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव और त्वचा की सुरक्षात्मक परत को नुकसान शामिल हैं।

शोध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र फाइब्रोब्लास्ट और केराटिनोसाइट नामक कोशिकाओं से संबंधित है। फाइब्रोब्लास्ट कोलेजन बनाने और ऊतकों को दोबारा विकसित करने में मदद करते हैं, जबकि केराटिनोसाइट नई त्वचा के निर्माण में महत्वपूर्ण हैं। मधुमेह में इन कोशिकाओं की गति, वृद्धि और विकास संकेतों के प्रति प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है।

वैज्ञानिक उन प्रोटीनों, जीनों और कोशिकीय संकेतों का भी अध्ययन कर रहे हैं, जो सूजन और ऊतक पुनर्निर्माण को नियंत्रित करते हैं। भविष्य में ये नई दवाओं और उपचारों के संभावित लक्ष्य बन सकते हैं।

आधुनिक घाव-पट्टियाँ, ग्रोथ फैक्टर आधारित उपचार, कोशिका-आधारित तकनीकें, ऊतक इंजीनियरिंग और विशेष जैव-सामग्रियों पर भी शोध हो रहा है। इनमें से कुछ तकनीकों का उपयोग चुनिंदा चिकित्सकीय परिस्थितियों में किया जाता है, जबकि कई अभी प्रयोगात्मक अवस्था में हैं। फिलहाल ऐसा कोई एक उपचार नहीं है, जो सभी मधुमेह संबंधी घावों को ठीक कर सके।

मुख्य चुनौती यह पहचानना है कि प्रत्येक रोगी में घाव भरने की प्रक्रिया को कौन-से जैविक कारण सबसे अधिक प्रभावित कर रहे हैं और उनका सुरक्षित उपचार कैसे किया जाए।

## प्रयोगशाला से बेहतर उपचार तक

वैज्ञानिक खोजों का वास्तविक महत्व तभी है, जब वे मरीजों के उपचार में सुधार लाएँ। मधुमेह के घावों की देखभाल केवल नई दवा या आधुनिक पट्टी तक सीमित नहीं है।

उपचार में घाव की उचित जाँच, रक्त शर्करा का नियंत्रण, घाव की सफाई और सही पट्टी लगाना तथा संक्रमण और रक्त संचार की स्थिति का आकलन करना शामिल है। पैरों में बने अल्सर के लिए प्रभावित हिस्से पर दबाव कम करना भी जरूरी हो सकता है। इसके लिए विशेष जूते, प्लास्टर या अन्य चिकित्सकीय उपकरण उपयोग किए जा सकते हैं।

यदि रक्त संचार बहुत कम हो, तो विशेषज्ञ रक्त वाहिकाओं से संबंधित उपचार की आवश्यकता का आकलन कर सकते हैं। कुछ मामलों में मृत ऊतक को हटाना, जिसे डिब्राइडमेंट कहा जाता है, उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

मधुमेह से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से अपने पैरों की जाँच करनी चाहिए। नया घाव, लालिमा, सूजन, गर्माहट, मवाद या त्वचा के रंग में बदलाव दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। यदि घाव में सुधार नहीं हो रहा है, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए।

मधुमेह के कारण बना पैर का घाव दर्द न होने पर भी गंभीर हो सकता है। बुखार, तेजी से फैलती लालिमा, काला पड़ता ऊतक या गंभीर संक्रमण के अन्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता आवश्यक है।

## रोकथाम ही सबसे अच्छा बचाव

मधुमेह के घावों से होने वाली समस्याओं को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका उन्हें बनने से रोकना है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार रक्त शर्करा नियंत्रित रखना, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान देना, तंबाकू से बचना, सही आकार के जूते पहनना और नियमित रूप से पैरों की जाँच करवाना जोखिम कम कर सकता है।

नंगे पैर चलने, स्वयं कॉर्न या कठोर त्वचा काटने और घाव पर तेज रसायन लगाने से बचना चाहिए। यदि पैरों में संवेदना कम हो या रक्त संचार खराब हो, तो छोटी-सी चोट को भी गंभीरता से लेना जरूरी है।

परिवार के सदस्य और देखभाल करने वाले लोग बुजुर्गों तथा सीमित गतिशीलता वाले रोगियों के पैरों के तलवों और उन हिस्सों की जाँच करने में सहायता कर सकते हैं, जिन्हें स्वयं देखना कठिन होता है।

## घाव भरने का भविष्य

मधुमेह के घावों का अध्ययन यह दर्शाता है कि एक बीमारी शरीर की अनेक जैविक प्रणालियों को एक साथ प्रभावित कर सकती है। समस्या केवल त्वचा के धीरे बंद होने की नहीं है, बल्कि रक्त संचार, प्रतिरक्षा, नसों के कार्य और ऊतक पुनर्निर्माण में आने वाली गड़बड़ियों की भी है।

भविष्य में घाव की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत उपचार विकसित हो सकते हैं। घाव में रक्त संचार, सूजन, सूक्ष्मजीवों और कोशिकाओं की गतिविधियों का आकलन करके अधिक उपयुक्त उपचार चुना जा सकेगा। वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर भी काम कर रहे हैं, जो घाव की स्थिति पर निगरानी रखने और जटिलताओं का जल्दी पता लगाने में सहायता कर सकती हैं।

हालाँकि, प्रयोगशाला में मिले आशाजनक परिणामों को विश्वसनीय उपचार मानने से पहले कठोर नैदानिक परीक्षणों से गुजरना आवश्यक है।

## निष्कर्ष

मधुमेह के घाव आज भी एक गंभीर चिकित्सा चुनौती हैं, लेकिन वैज्ञानिक शोध से यह समझ लगातार बेहतर हो रही है कि वे आसानी से क्यों नहीं भरते। उच्च रक्त शर्करा, खराब रक्त संचार, नसों की क्षति, लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन और कमजोर ऊतक पुनर्निर्माण मिलकर घाव भरने की प्रक्रिया को कठिन बना देते हैं।

आशा की बात यह है कि इन जैविक समस्याओं की पहचान करके वैज्ञानिक अधिक प्रभावी और लक्षित उपचार विकसित कर सकते हैं। तब तक घाव का समय पर पता लगाना, उचित देखभाल, रक्त शर्करा का नियंत्रण और शीघ्र चिकित्सा सहायता सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।

किसी छोटे घाव को केवल इसलिए अनदेखा नहीं करना चाहिए कि वह देखने में मामूली लगता है। मधुमेह में जागरूकता और समय पर कार्रवाई चलने-फिरने की क्षमता बचा सकती है, गंभीर जटिलताओं को रोक सकती है और जीवन की रक्षा कर सकती है। विज्ञान का अंतिम उद्देश्य केवल यह समझना नहीं है कि घाव क्यों नहीं भरते, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि अधिक से अधिक रोगी सुरक्षित रूप से स्वस्थ हों, आत्मनिर्भर बने रहें और बेहतर जीवन जी सकें।

*वैज्ञानिक आधार:* वर्ष 2026 में प्रकाशित हालिया समीक्षाएँ भी मधुमेह के घावों में लगातार बनी रहने वाली सूजन, नई रक्त वाहिकाओं के निर्माण में बाधा और ऊतक-मरम्मत करने वाली कोशिकाओं की खराब कार्यक्षमता की भूमिका को रेखांकित करती हैं। वैज्ञानिक लक्षित और पुनर्योजी उपचारों पर शोध कर रहे हैं, लेकिन इनमें से कई अभी प्रयोगात्मक अवस्था में हैं।

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*डॉ. विजय गर्ग*
सेवानिवृत्त प्राचार्य | प्रख्यात वैज्ञानिक
स्ट्रीट कौर चंद, एम एच आर मलोट, पंजाब – 152107
मोबाइल: 9465682110

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