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Friday, October 9, 2026

यूपी रोडवेज की बसों में डीजल चोरी रोकने के लिए लगेंगे सेंसर, अधिकारियों को तुरंत मिलेगा अलर्ट

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लखनऊ
प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों से डीजल चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए नई तकनीक अपनाई जाएगी। इसके तहत बसों के डीजल टैंक में सेंसरयुक्त उपकरण लगाए जाएंगे, जो ईंधन चोरी होने या रिसाव की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजेंगे। इसके अलावा, टैंकों में विशेष वॉल्व भी लगाए जाएंगे, ताकि डीजल भरने के बाद उसे दोबारा निकालना आसान न हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य ईंधन की सुरक्षा बढ़ाना और चोरी से होने वाले नुकसान को कम करना है।

परिवहन निगम प्रशासन नई बसों की खरीद के दौरान इस तकनीक को अनिवार्य करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बसों की चेसिस खरीदने से संबंधित टेंडर की शर्तों में सेंसर लगाने का प्रावधान शामिल किया जा रहा है। इसके तहत ऑटोमोबाइल कंपनियों को डीजल टैंक में सेंसरयुक्त डिवाइस लगाकर ही नई बसें उपलब्ध करानी होंगी। इससे बसों में ईंधन की स्थिति पर लगातार निगरानी रखना संभव हो सकेगा।

नई व्यवस्था के जरिए डीजल की खपत और टैंक से होने वाले रिसाव का भी पता लगाया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति डीजल निकालने या चोरी करने का प्रयास करता है, तो सेंसर संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देगा। अधिकारियों को समय रहते जानकारी मिलने से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई में मदद मिल सकती है। रेलवे के इंजनों में भी इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ईंधन की निगरानी करने में सहायता मिलती है।

रोडवेज बसों से डीजल चोरी की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। पिछले वर्ष अवध बस डिपो से 2,879 लीटर डीजल चोरी होने का मामला दर्ज किया गया था। वहीं, खुर्जा डिपो में करीब दो साल तक चोरी की घटनाएं सामने आने के बाद छह चालकों को निलंबित किया गया था। इसके अलावा, 25 नवंबर 2021 को कैसरबाग डिपो की सात बसों से 60 लीटर डीजल चोरी होने का मामला भी सामने आया था। इन घटनाओं के मद्देनजर परिवहन निगम नई बसों में सेंसर और विशेष वॉल्व लगाने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि ईंधन की निगरानी मजबूत हो और चोरी की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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