नई दिल्ली। मौलाना साजिद रशीदी का एक बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है। बयान में उन्होंने वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को लेकर दावा किया कि “मुसलमान का बच्चा वृद्धाश्रम में मां-बाप को नहीं छोड़ता।”
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में मौजूद वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोगों को देखने पर “सब हिंदू हैं, मुसलमान नहीं हैं।”
मौलाना के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, दिल्ली के सभी वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोगों की धार्मिक पहचान के संबंध में उनके दावे का कोई आंकड़ा या स्वतंत्र प्रमाण इस बयान में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
बयान के बाद वृद्धजन देखभाल, पारिवारिक जिम्मेदारी और धर्म के आधार पर किए जा रहे दावों को लेकर बहस तेज हो गई है।


