– मुंबई में सिम खरीदने और अपहरणकांड में इस्तेमाल का आरोप लगाकर डराया
– छह दिन तक वीडियो कॉल पर रखा
लखनऊ। राजधानी में साइबर जालसाजों ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बड़ी ठगी को अंजाम दिया। 66 वर्षीय पूर्व बैंक अधिकारी आदेश कुमार यादव को जालसाजों ने मुंबई में उनके आधार कार्ड से सिम खरीदे जाने की बात कहकर डराया। इसके बाद उस सिम का इस्तेमाल कथित रूप से एक अपहरणकांड में फिरौती मांगने में किए जाने का आरोप लगाया गया।
जालसाजों ने बुजुर्ग को बताया कि उनके खिलाफ मुंबई में मुकदमा दर्ज है और मामला गंभीर अपराध से जुड़ा है। इसके बाद आरोपियों ने खुद को ईडी अधिकारी बताकर कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय पैदा किया। कथित तौर पर आदेश कुमार यादव को करीब छह दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी का दबाव बनाया गया।
लगातार धमकियों और गिरफ्तारी के डर से बुजुर्ग इस कदर भयभीत हो गए कि उन्होंने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तक तुड़वा दी। जालसाजों के निर्देश पर उन्होंने अपनी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी। बताया जा रहा है कि कुल 95.66 लाख रुपये की रकम दो बैंक खातों में भेजी गई।
ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल रकम हासिल करने और पीड़ित से संपर्क करने में किया गया।
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में साइबर अपराधी आम तौर पर पुलिस, सीबीआई, ईडी, एनसीबी या अन्य जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। पीड़ित को किसी आपराधिक मामले में फंसाने या गिरफ्तारी का डर दिखाकर उससे बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने को कहा जाता है। लखनऊ में इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में लाखों रुपये की ठगी सामने आ चुकी है।
सितंबर 2026 में लखनऊ में एक बुजुर्ग महिला को भी कथित तौर पर सीबीआई अधिकारी बनकर नौ दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने और नौ लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया था।


