– भाद्रपद पूर्णिमा पर स्नान-दान के साथ शनिदेव की आराधना
– पितरों के तर्पण का भी विशेष महत्व
नई दिल्ली। भाद्रपद पूर्णिमा के साथ शनिवार को पितृ पक्ष का शुभारंभ हो रहा है। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और दान-पुण्य का विशेष काल माना जाता है। इस दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और जरूरतमंदों को दान करते हैं।
पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु पवित्र नदियों, सरोवरों और तीर्थस्थलों में स्नान कर पूजा-अर्चना तथा दान-पुण्य करते हैं। शनिवार होने के कारण आज शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जा रहा है। श्रद्धालु शनिदेव को तेल, तिल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-शांति की कामना करेंगे।
पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए तर्पण एवं दान से पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त होती है। परिवार अपनी परंपरा और मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म संपन्न करते हैं।
पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल और सामर्थ्य के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान पुण्यकारी माना जाता है।
पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की गतिविधियां बढ़ गई हैं। कई परिवार अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध कर्म की तैयारियों में जुट गए हैं। मंदिरों और तीर्थस्थलों पर भी विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है।


