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Friday, September 25, 2026

एडीएम के आदेश के बाद भी नहीं हटा सरकारी रास्ते से कब्जा, मुख्यमंत्री से शिकायत

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– करणी सेना ने लेखपाल पर कार्रवाई में लापरवाही का लगाया आरोप, किसानों ने जताई परेशानी

फर्रुखाबाद। ग्राम पंचायत गंगोली, पोस्ट अवाजपुर में प्राथमिक विद्यालय के पास स्थित सरकारी चकरोड पर कथित अवैध अतिक्रमण को लेकर मामला गरमा गया है। करणी सेना के नेता मोहन सिंह ने राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत भेजी है।
मोहन सिंह का आरोप है कि गांव के ही वीरपाल सिंह उर्फ बिल्लू द्वारा सरकारी रास्ते पर भैंसागाड़ी खड़ी करने, पशु बांधने तथा गोबर-घूरा आदि डालने के कारण चकरोड का आवागमन प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि इससे ग्रामीणों और आसपास के किसानों को अपने खेतों तक ट्रैक्टर-ट्रॉली ले जाने तथा कृषि कार्य करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने 13 सितंबर 2026 को इस संबंध में अपर जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी थी। उनका दावा है कि शिकायत के बाद एडीएम स्तर से संबंधित हल्का लेखपाल हिमांशु गुप्ता को मौके पर जाकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मोहन सिंह के मुताबिक, 13 से 18 सितंबर के बीच मौके पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने दोबारा एडीएम से दूरभाष पर शिकायत की। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद भी संबंधित स्थल से पशु और अन्य सामग्री हटाने तथा रास्ते की सफाई कराने की कार्रवाई नहीं की गई।
मामले में अब करणी सेना के जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और सरकारी रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। शिकायत में संबंधित राजस्व कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि चकरोड बंद होने से किसानों को खेतों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। विशेष रूप से ट्रैक्टर-ट्रॉली से कृषि कार्य करने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
करणी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारी रास्ते से अतिक्रमण नहीं हटाया गया और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन ग्रामीणों और किसानों के साथ तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेगा।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों पर राजस्व विभाग, संबंधित लेखपाल तथा कथित अतिक्रमणकारी पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है। प्रशासनिक जांच और मौके की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता पूरी तरह सामने आ सकेगी।

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